Friday, 18 September 2015


आज काफी असहज दिन है समझ में नहीं आता की क्या लिखू या क्या न लिखू 

Tuesday, 15 September 2015

कल शाम मैं ऑफिस से घर जा रहा था। रास्ते में मोड़ पर एक वृद्ध भिखारी ने आवाज़ दी, "सवेरे से भूखा हूँ बेटा, कुछ दया करो।"

मेरा दिल भर आया और मैंने अपने नाश्ते के लिए रखा चिप्स का पैकेट बैग से निकालकर उस वृद्ध भिखारी को दे दिया और आगे बढ़ने लगा।

तभी भिखारी ने मुझे आवाज दी। वैसे तो मुझे जल्दी थी पर उसके आवाज देने पर मैं रुक गया और पलटकर उसके पास आया।

वृद्ध भिखारी ने मुझे स्नेह से देखा और अंदर की चोर पाकेट से 140/-रुपये निकालकर मेरी हथेली पर धर दिए।

मैं हकबका कर बोला, "बाबा ये क्या?"

वृद्ध भिखारी ने ममतापूर्ण स्वर में कहा, "बेटा! तुमने इतने प्यार से मुझे नमकीन का पैकेट दिया तो मेरा भी मूड बन गया। बस सामने के ठेके से एक क्वार्टर ला दो। भगवान् तुम्हारा भला करेंगे।

ऋषभदेव शर्मा की कलम से ........................

नाग की बाँबी खुली है आइए साहब
भर कटोरा दूध का भी लाइए साहब

रोटियों की फ़िक्र क्या है? कुर्सियों से लो
गोलियाँ बँटने लगी हैं खाइए साहब

टोपियों के हर महल के द्वार छोटे हैं
और झुककर और झुककर जाइए साहब

मानते हैं उम्र सारी हो गई रोते
गीत उनके ही करम के गाइए साहब

Sunday, 13 September 2015


श्री शिव मंगल सिंह 'सुमन' जी की कलम ---------

तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

आज सिन्धु ने विष उगला है
लहरों का यौवन मचला है
आज हृदय में और सिन्धु में
साथ उठा है ज्वार

तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

लहरों के स्वर में कुछ बोलो
इस अंधड में साहस तोलो
कभी-कभी मिलता जीवन में
तूफानों का प्यार

तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

यह असीम, निज सीमा जाने
सागर भी तो यह पहचाने
मिट्टी के पुतले मानव ने
कभी न मानी हार

तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

सागर की अपनी क्षमता है
पर माँझी भी कब थकता है
जब तक साँसों में स्पन्दन है
उसका हाथ नहीं रुकता है
इसके ही बल पर कर डाले
सातों सागर पार

तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

कविवर श्री दुष्यंत जी की कलम से --------

मेरे स्वप्न तुम्हारे पास सहारा पाने आयेंगे
इस बूढे पीपल की छाया में सुस्ताने आयेंगे

हौले-हौले पाँव हिलाओ जल सोया है छेडो मत
हम सब अपने-अपने दीपक यहीं सिराने आयेंगे

थोडी आँच बची रहने दो थोडा धुँआ निकलने दो
तुम देखोगी इसी बहाने कई मुसाफिर आयेंगे

उनको क्या मालूम निरूपित इस सिकता पर क्या बीती
वे आये तो यहाँ शंख सीपियाँ उठाने आयेंगे

फिर अतीत के चक्रवात में दृष्टि न उलझा लेना तुम
अनगिन झोंके उन घटनाओं को दोहराने आयेंगे

रह-रह आँखों में चुभती है पथ की निर्जन दोपहरी
आगे और बढे तो शायद दृश्य सुहाने आयेंगे

मेले में भटके होते तो कोई घर पहुँचा जाता
हम घर में भटके हैं कैसे ठौर-ठिकाने आयेंगे

हम क्यों बोलें इस आँधी में कई घरौंदे टूट गये
इन असफल निर्मितियों के शव कल पहचाने जयेंगे

हम इतिहास नहीं रच पाये इस पीडा में दहते हैं
अब जो धारायें पकडेंगे इसी मुहाने आयेंगे
रेफ: के०पी०/लख/प्रशासनिक/2015-16/                                       दिनांक: 05.09.2015
                                                                    प्रति- उत्तर
                                                                    पंजीकृत डाक
  सेवा में,
  श्रीमान हर्षवर्धन जी
  उप प्रबंधक (व्यवसाय)
  एन०सी०सी०एफ़०
  दीपाली भवन 5 तल
  92 नेहरू प्लेस
  नई दिल्ली -110001

   विषय : मैसर्स के०पी० गंगा किसान विकास सेवा समिति द्वारा बकाया दिखाई जा रही राशी के सम्बन्ध में |

 महोद्य,
         उपरोक्त विषयांतरगत आपके पत्र भाराउससं/मुख्या/खाद्यान्न/2015-16/4711 दिनांक 31 अगस्त 2015
समिति के समक्ष आपने एन०सी०सी०एफ़ लखनऊ के द्वारा भुगतान ना करने का निम्नाकित 4 कारणों का उल्लेख किया है | जो प्रथम दृष्टि में ही निराशाजनक लगते है एवं आपके पत्र से ये तथ्य उजागर होता है की एन०सी०सी०एफ़ क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ की प्रसाशनिक शक्तियां कितनी प्रबल है की वह उल्टे सीधे तथ्य मुख्यालय में प्रस्तुत करे और मुख्यालय उन तथ्यों पर अपने विवेक के अनुसार प्रश्न भी ना कर सके | आपके पत्रानुसार उठाये गए कारणों का बिन्दुवार उत्तर नीचे उपलब्ध है :-

1)      पत्र में अपने उल्लेख किया है की वर्तमान में  मैसर्स के०पी० गंगा किसान विकास सेवा समिति  का कोई खाता नहीं है अगर आप अपने विवेक से सोचे तो पायेगें की जिस समिति की रजिस्ट्रेशन राशी  अभी एन०सी०सी०एफ़ के पास जमा है उसका खाता कैसे उपलब्ध नहीं है अगर आप की बात सही है तो एन०सी०सी०एफ़ लखनऊ ने समिति को सूचित क्यू नहीं किया और वह किस आधार पर खातों का मिलान या कांटा बाँट जमा करवाने को कह रही है | समिति का फाइनल सेटलमेंट किये हुये बिना एन०सी०सी०एफ़ लखनऊ ने खाते की अनुपलब्धता का ब्यौरा मुख्यालय को उपलब्ध करा दिया | सम्बंधित बिन्दु से यह स्पष्ट है की एन०सी०सी०एफ़ लखनऊ के कार्यों में पारदर्शिता का आभाव है एवं क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ में कार्यरत कर्मचारी अपने निजी लाभ या द्वेष की वजह से किस निम्न स्थिति में पहुच सकते है | क्षेत्रीय कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी ऐसा सिर्फ इस लिए कर रहे है की समिति के पदाधिकारियों ने माननीय प्रबंध निदेशक एन०सी०सी०एफ़ नई दिल्ली से उनकी शिकायत की | परन्तु माननीय प्रबंध निदेशक के पद भार छोड़ते ही अब वे खुलेआम हमारे पदाधिकारियों से कह रहे है की “तुम लोगों ने हमारा क्या बिगड़ लिया” | जिससे पता चलता है की उनका अपने मुख्यालय के प्रति कितना सम्मान है |
2)      पत्र बिन्दु संख्या 2 के जवाब में समिति के द्वारा लिखा गया पत्र संलग्न है जो की एन०सी०सी०एफ़ वाराणसी को लिखा गया तथा उसकी प्रतिलिपि एन०सी०सी०एफ़ लखनऊ को दी गई है | सम्बंधित संलग्न पत्र स्वम में आपके बिन्दु 2 की व्याख्या करने में सक्षम है, उसके लिए समिति को अलग से व्याख्या/स्पष्टीकरण देने/ करने की आवश्यकता नही है |
3)      पत्र बिन्दु संख्या 3 के जवाब में समिति के द्वारा लिखा गया पत्र एवं बिलों की सूचीबद्ध विवरण संलग्न है जो आपको एवं मुख्यालय को सीधे तौर पर स्पष्टीकरण देता है | बिलों के मिलान में एन०सी०सी०एफ़ लखनऊ ने किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं किया | उन्होंने जिस कर्मचारी को इसके लिए नियुक्त भी किया, उसे भी इतना अतिरिक्त कार्य सौप दिया जाता है की वह चाह कर भी मिलान नहीं करवा पाता | इस सम्बन्ध में समिति ने कई बार पत्र व्यवहार किया परन्तु क्षेत्रीय प्रबंधक ने उसे अनसुना कर दिया | अगर बकाया भुगतान से सम्बंधित अन्य कोई जानकारी आपको चाहिए, तो आपको अपने लेखाविभाग तक जाने की जहमत करनी पड़ेगी एवं श्री गुप्ता जी महा प्रबन्धक लेखा विभाग से जानकारी हासिल करनी पड़ेगी क्यू की वे स्वम समिति के लेखाभिलेखो की जाँच के लिए यहाँ उपस्थित हुये एवं जाचं उपरांत उन्होंने क्षेत्रीय प्रबंधक श्री शौकत अली को भुगतान करने के लिए कहा, एवं  क्षेत्रीय प्रबंधक श्री शौकत अली जी ने उन्हें आश्वासन भी दिया की वे जल्दी ही भुगतान प्रक्रिया शुरू कर देगे, परन्तु उनकी कार्यशेली के अनुसार वो दिन आज तक नहीं आया |
4)      पत्र बिन्दु संख्या 4 के जवाब में समिति सिर्फ इतना कहना चाहती है तीन वर्ष पूर्व में हुई खरीदी की शिकायत अब क्यू हो रही है | समिति को एक ऐसे व्यक्ति का नाम बताये जिसका भुगतान ना हुआ हो और वह तीन वर्षो तक भुगतान के लिए चुपचाप बैठा हो और अगर इस मामले में अगर सत्यता भी थी तो क्षेत्रीय प्रबंधक ने उसी प्रभावी विपणन वर्ष में भुगतान की निगरानी क्यू नहीं की | इस से पता चलता है की क्षेत्रीय प्रबंधक की कार्यशैली गलत एवं गैर-जिम्मेदाराना भी है और वह अपना काम सही तरीके से नहीं कर रहे थे/है | समिति के खिलाफ लगातार षड्यंत्र हो रहा है | समिति के षडयंत्रकारी/विरोधी प्रबल हो रहे है क्यू की उन्हें आपके क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ से ही समुचित खुराक मिल रही है ऐसा क्यू हो रहा है यह पहले बिन्दु में ही स्पष्ट किया जा चूका है | फिर भी समिति आपको बताना कहेगी की जो भी किसान न्यालय गए थे वे सभी हमारी समिति के नहीं है वे ग्रामीण उत्पाद सेवा समिति से सम्बंधित है तथा उन सभी को भुगतान प्राप्त हो चूका है एवं उनकी परेड भी क्षेत्रीय प्रबंधक श्री शौकत अली जी के सामने करवा दी गई है साथ ही सभी किसानो ने न्यायलय के समक्ष सपथ पत्र देकर स्वीकार किया की उनको भुगतान प्राप्त हो चूका है जिसकी प्रतिलिपि पत्र के साथ संलग्न है |
उपरोक्त तथ्यों के बिन्दुवार जवाब से संभव है आपकी जिज्ञासा शांत हो गई होगी | अपने अपने उपरोक्त पत्र        में लिखा है की समिति के द्वारा 4 जुलाई को लिखे पत्र में जो अनुरोध किया गया था उस सम्बन्ध में आपने

जानकारी का परिक्षण किया परन्तु आपके पत्र में उसकी अनुभूति नहीं है | समिति अपनी जगह बिलकुल सही है एवं उसे अपनी कार्यप्रणाली को लेकर भी शंका नहीं है
विगत दिनों में एन०सी०सी०एफ़ लखनऊ के साथ समिति के पदाधिकारियों ने महसूस किया है की आपका क्षेत्रीय कार्यालय मुख्यालय के अधीन नहीं है बल्कि मुख्यालय क्षेत्रीय कार्यालय के अधीन है एवं आप सब का अपने क्षेत्रीय कार्यालयों एवं उनमे काम कर रहे कर्मचारियों पर नियंत्रण नहीं है |
आपके पत्र से अत्यंत निराशा एवं दुःख का अनुभव हुआ |
सूचनार्थ प्रेषित|
धन्यबाद,
संलग्न : 1) पंजीयन शुल्क की देय राशी का चेक प्रतिलिपि – बिन्दु 1 के प्रति-उत्तर में |
       2) कांटा बाँट ना जमा करवाने का कारण के सम्बन्ध में लिखे गए पत्र की प्रतिलिपि  - बिन्दु 2 के
          प्रति-उत्तर में |
       3) बिलों के मिलन में हो रहे विलम्ब का शिकायत पत्र एवं बिलों की क्रम बद्ध सूची की प्रतिलिपि
          (दो पत्र) -  बिन्दु 3 के  प्रति-उत्तर में |
       4)न्यायलय आदेश एवं सपथ की प्रतिलिपि - बिन्दु 4 के प्रति-उत्तर में |


     भवदीय 
 
                               
                                                                  सचिव
                                                        के०पी० गंगा किसान विकास सेवा समिति
                                                             लखनऊ {उ०प्र०}


प्रतिलिपि : क्षेत्रीय प्रबंधक, क्षेत्रीय कार्यालय -लखनऊ