Wednesday, 30 December 2015

न्यू इयर रिजोलुसन

हर नया साल झूठी उम्मीदें देता है और हर निकम्मे को भ्रम हो जाता है की शायद इस साल वह सुधर जाये |
नए साल में सुधर की उम्मीद करना ठीक वैसा ही है जैसे कोई नालायक बच्चा रेगुलर पढाई करने की सोचता है;
तो नया कापी पेन खरीद लता है | एक आध दिन जोश जोश में उसमे कुछ नोटस बनाता है मगर तीसरे दिन ही 
कापी के आखरी पेज पर तीर वाला दिल बनाकर 'आई लव यू पिंकी' लिख रहा होता है  माँ द्वारा प्यार से दिलाई गई नई कापी तीसरे दिन ही मसूका के प्यार में रंग दी जाती है | बात पिंकी के कान  तक नहीं पहुच पाती; मगर तीर के दिल वाली चित्रकारी बाप के हाथ लग जाती है | पिंकी के चक्कर में हमारा  पढ़ाकू बाप द्वारा पिट पीट कर रेड कर कर दिया जाता है |
हर नया साल उस नई कापी की तरह होता है | जिसमे एक दो दिन में सुधर जाने का रिजोलुसन दिखाते है और तीसरा दिन आते आते फिर अपनी गन्दी  आदतें यानी पिंकी के आगोश में चले जाते है |

 कभी कभी मुझे लगता है की सेकेंड ; मिनट ; घंटा ; दिनमहिना; साल ये सिर्फ समय की इकाइयाँ नहीं है बल्कि काम को टालते रहने की सम्भावनाये है | पहले हम हप्ते भर के सरे कम सन्डे को टाल देते है फिर सन्डे को इतना कम हो जाता है की टी नहीं कर पते की कौन सा काम करे और कौन सा काम नहीं करे | चूँकि भैया कम आपके है तो टी भी आप को करना है की कौन सा काम करना है और किस के बिना किये भी काम चल जायेगा | तो बहुत जड़ी ही आप इस नतीजे पर पहुच जातें है की फेसबुक पर बैठने और खाने सोने के के अलावा कोई भी ऐसा काम नहीं है जिसको अगले सन्डे के लिए टाला ना जा सके | मगर इस वादे के सतत की एक दिन मै इसे जरुर करूँगा |
सुधरने के खुद से किये गए वादे इन्सान को गन्दी आदतें बनाये रखने का हौसला देतें है | हर साल का आखरी दिन, रिजोलुसन के जरिये हौसलों की इस बैटरी को रिचार्ज करने का मौका होता है | वैसे भी न्यू इयर रिजोलुसन एक ऐसा जोक है जिसकी सबसे ज्यादा रिपीट वैल्यू है | तो आइये एक बार फिर से स्वम को वही चुटकला सुनाये और अपने को हने का मौका दे.|

Thursday, 10 December 2015

सत्य कदाचित्: ना विजयष:

सत्य कभी नहीं जीतता | क्यू की सत्य रविन्द्र पाटिल की तरह सडको पर घिस घिस कर मर जाता है |
एक बार एक फिल्म देखी थी "जाने भी दो यारों" उस में दिखाया गया था की आप चाहे सच के साथ कितना भी खड़े रहे; चाहे कितना भी सच का दम लगा ले; लेकिन जीतता वो है जो बलवान होता है ; जिसके पास पैसा होता है ; जिसके पास राजनैतिक ताकत होती है | सलमान खान इसका बेहद सटीक उदाहरण है | बरी होने के बाद गोया रोने भी लगे इससे पता चलता है की वे रील में ही नहीं रियल लाइफ में भी एक अच्छे अभिनेता है | बॉम्बे हाईकोर्ट ने 13 साल पुराने हिट एंड रन मामले में सलमान खान को बरी कर दिया। मुंबई सेशन्स कोर्ट ने इस मामले में सलमान को पांच साल की सजा सुनाई थी। गुरुवार को हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्रॉसिक्यूशन सलमान पर कोई भी आरोप साबित नहीं कर पाया। फैसला सुनते ही सलमान अदालत में रो पड़े। बता दें कि 2002 में मुंबई में सलमान की तेज रफ्तार कार फुटपाथ पर चढ़ गई थी। इसमें एक शख्स की मौत हुई थी।

Sunday, 6 December 2015

भाँती भाँती के प्राणी

भारत एक अत्यंत राय बांटू प्रवत्ति का देश है। यहाँ प्राय: चार किस्म के 'रायचंद' पाए जाते हैं।
1. लघु ज्ञानचंद
- अकर्मण्य एवं निक्कमे लोग देश चलाने पर ज्ञान की गंगा बहाते नजर आते हैं। हालांकि वे स्वयं के काम में निम्न कोटि की उत्पादकता प्रेषित करते हैं। इन्हें बस बहस का मुद्दा दीजिए और कमाल देखिए।

2. मध्यम ज्ञानचंद- वह लोग जो पचास हजार रुपए महीना तक कमाते हैं। प्राय: दाल, टमाटर, प्याज के भाव पर चिंतन के बहाने ज्ञान बांटा करते हैं। ऐसे लोग ज्यादातर मॉल में Window Shopping करते एवं McDonald पर बर्गर खाते पाए जाते हैं। महंगाई को ताख में रख कर Multiplex में 180 के टिकट पर फिल्म देखना पसंद करते हैं। जहाँ कहीं भी सेल लगी हो वहाँ इनका जमघट देखा जा सकता है।

3. उत्तम ज्ञानचंद - ऐसे लोग जो लाखों में खेलते हैं, प्राय: किसानों की मृत्युदर, भ्रष्टाचार, उद्योग जगत और अर्थव्यवस्था पर ज्ञान पेलते पाए जाते हैं। तुलनात्मक विश्लेषण में पारंगत ऐसे लोग पानी सिर्फ Bisleri का पीते हैं, कपड़े ब्रांडेड पहनते हैं और जनसंख्या एवं गंदगी पर सरकार से क्षुब्ध नजर आना इनका विशेष शौक है। गाड़ी का शीशा नीचे करके टिशु पेपर/ सोडा बॉटल फेंकने में विशेष महारत हासिल यह लोग स्वच्छ भारत अभियान को कोसना नहीं भूलते।

4. अत्यंत ज्ञानचंद - वह लोग जो करोड़ों अरबों में खेलते हैं प्राय: सहिष्णुता-असहिष्णुता, सांप्रदायिकता एवं धर्म-निरपेक्षता जैसे भारी भरकम शब्दों पर मीडिया के सामने ज्ञान वितरण का मौका ढूंढते हैं और अवसर प्राप्त होते ही विशेष ज्ञान का उत्सर्जन कर समस्त छोटे ज्ञानचंदों को भौंचक्का कर देते हैं। ऐसे लोगों की एक टाँग हमेशा विदेश में रहती है और स्विस बैंक से विशेष प्रेम। नैतिकता का उपदेश देना इनका फेवरेट पास टाइम है और देश को अपमानित करना इनकी महानता का मापदंड। पेज थ्री की पार्टियां अटेंड करना और ट्वीट करना इनका विशेष शौक है। अनैतिकता का कचरा इनके कारपेट के नीचे हमेशा दबा मिलता है।

Friday, 4 December 2015

हमारे देवी देवता


प्राचीन काल से सनातन धर्म में 33 करोड़ देवी-देवताओं का पूजन करने का विधान है।
हिंदू धर्म का अनुसरण करने वाले अपने-अपने मतानुसार उनका पूजन करते हैं।
क्या सच में हिंदू धर्म में 33 करोड़ देवी-देवता हैं। इस संदर्भ में संस्कृत में कोटि वचन के
दो अर्थ माने जाते हैं। एक मतलब है प्रकार और द्वितिय मतलब है करोड़।
 देवी-देवताओं के निर्देश में भी कोटि शब्द का प्रथम अर्थ प्रकार ही काम में लिया गया है।
इस प्रकार है हिंदू धर्म के 33 देवी-देवताओं की गणना-
देवताओं की 33 श्रेणियों में आठ वसु, ग्यारह रुद्र, बारह आदित्य, इंद्र और प्रजापति जोड़े गए हैं।
12 आदित्य - अंशुमान, अर्यमन, इंद्र, त्वष्टा, धातु, पर्जन्य, पूषा,
                     भग, मित्र, वरुण, वैवस्वत और विष्णु
8 वसु - आप, ध्रुव, सोम, धर, अनिल, अनल, प्रत्यूष, प्रभाष
11 रूद्र - मनु, मन्यु, शिव, महत, ऋतुध्वज, महिनस, उम्रतेरस,
             काल, वामदेव, भव और धृत-ध्वज हैं।
2 अश्विनी - अश्विनी तथा कुमार (कुछ विद्वान इंद्र तथा प्रजापति की जगह पर अश्विनी कुमारों 
                                             को मानते हैं।)
इस प्रकार सब मिलाकर 12 आदित्य + 8 वसु + 11 रूद्र +
   2 अश्विनी कुमारों का कुल जोड़कर 33 कोटी देवता माने जाते हैं।