मैंने अंग्रेजी में लिखा है अपने राहुल भैया भी पुर्जी में लिख कर ले जाते है वो भी अंग्रेजी में । "इसका क्या मतलब हुआ " हमने बड़ी जिज्ञासा से अशोक भाई से पूछा । अमे तुम भी कमाल के ढक्कन हो, कुछ समझते नहीं बस सवाल पर सवाल । लेकिन हमने तो केवल एक ही सवाल दा गा था । चुप कर ढक्कन वे खिसियाए अरे पुर्जी मतलब नक़ल । लोग कहते थे की संसद में नक़ल नहीं हो सकती लेकिन भैया ये तो कमाल हो गया हमारे राहुल भैया पुरे जोश के साथ पुर्जी लाते है नक़ल करते है अकल लगाते है और सफल हो जाते है । नक़ल से याद आया की भैया हमारी दादी कहती थी की नेता जी के ज़माने में जो पास नहीं हो सकता भैया वह पढाई का सपना छोड़ ही दे तो अच्छा । समझे ढक्कन ' अशोक भैया मूछो पर तव देते हुये बोले । हमारे अशोक भैया का तकिया कलाम है ढक्कन । हर बात पर ढक्कन । ढक्कन कहाँ जा रहा है , ढक्कन यहाँ आ ,ढक्कन बैठ , तुम तो बड़े ढक्कन हो वगेरा वगेरा । एक दिन तो हद हो गई उनके पिता जी ने उनकी माता जी को बुलाया वो शायद सुनी नहीं । बस बाप जान ने अशोक भाई से कहा की जरा अपनी मम्मी को बुला तो । आदत से मजबूर अशोक भैया, माता जी के पास गये और तपाक से बोले आपको ढक्कन बुला रहा है । बस फिर क्या था पिता जी की चप्पल और उनका टकला पर चाँद निकल आया।, दिन में ही । लईकिन क्या मजाल की उनका ढक्कन बंद हो जाये आई मीन तकिया कलाम । खैर ढक्कन मतलब अशोक भैया को आज कल राजनीती में यका यक रूचि हो गई है । क्या अख़बार , क्या रेडिओ, क्या टीबी सब पर पैनी नज़र और मौका मिलते ही आकाशवाणी शुरू । मोदी जी , राहुल जी, सोनिया सब पर पूरी खबर । एक दिन तो हद कर दी बोले मोदी जी कांग्रेस से घोटालो पर सारणी बनवा रहे है हमने लपकते हुए पूछा उ कैसे भैया । अमे तुम भी कमाल के ढक्कन हो । अरे संसद में जो रशि कशी चल रही है उसी से पता चला की सारणी बन रही है तुम हमारी बताओ हम तुम्हारी बताएंगे । लेकिन एक बात है सब कह रहे है तुम बड़े घोटालेबाज हो । लेकिन एक बात नहीं समझ आई ढक्कन की मोदी जी तो अबही आये है एक ही साल हुए है फिर बड़े कैसे । अरे सीनियर सिटीजन का ख़िताब तो अपनी कांग्रेस के पास है । लईकिन ढक्कन कुछ भी हो अपने राहुल बाबा नक़ल के साथ जब से अकल लगाये है तब से इज्कल टु सफल हो रहे है ।
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