गाव की पगडंडी से गुजरती हुई सड़क के किनारे हमारे ढक्कन गुरु मतलब अशोक भैया अपने चेलों के साथ एक बोर्ड लगाकर बैठे हुए थे, जिस पर लिखा था, महान ज्योतिष सम्राट आपको आगे आने वाले खतरे के बारे में बतायेगे । "ठहरिये... आपका अंत निकट है। इससे पहले कि बहुत देर हो जाये, रुकिए! हम आपका जीवन बचा सकते हैं।"
एक कार फर्राटा भरते हुए वहाँ से गुजरी। चेलों ने ड्राईवर को बोर्ड पढ़ने के लिए इशारा किया। ड्राईवर ने बोर्ड की तरफ देखा और गरियाता चेलों से यह कहता हुआ निकल गया, "तुम लोग इस बियाबान जंगह में भी धंधा कर रहे हो, शर्म आनी चाहिए।"
चेलों ने असहाय नज़रों से ढक्कन गुरूजी की ओर देखा।
ढक्कन गुरूजी बोले, "जैसे प्रभु की इच्छा।"
कुछ ही पल बाद कार के ब्रेकों के चीखने की आवाज आई और एक जोरदार धमाका हुआ।
कुछ देर बाद एक मिनी-ट्रक निकला। उसका ड्राईवर भी चेलों को दुत्कारते हुए बिना रुके आगे चला गया। कुछ ही पल बाद फिर ब्रेकों के चीखने की आवाज़ और फिर धड़ाम।
ढक्कन गुरूजी फिर बोले, "जैसी प्रभु की इच्छा।"
अब चेलों से रहा नहीं गया और वह बोला, "ढक्कन गुरूजी, प्रभु की इच्छा तो ठीक है पर कैसा रहे यदि हम इस बोर्ड पर सीधे-सीधे लिख दें कि 'आगे पुलिया टूटी हुई है'।"
एक कार फर्राटा भरते हुए वहाँ से गुजरी। चेलों ने ड्राईवर को बोर्ड पढ़ने के लिए इशारा किया। ड्राईवर ने बोर्ड की तरफ देखा और गरियाता चेलों से यह कहता हुआ निकल गया, "तुम लोग इस बियाबान जंगह में भी धंधा कर रहे हो, शर्म आनी चाहिए।"
चेलों ने असहाय नज़रों से ढक्कन गुरूजी की ओर देखा।
ढक्कन गुरूजी बोले, "जैसे प्रभु की इच्छा।"
कुछ ही पल बाद कार के ब्रेकों के चीखने की आवाज आई और एक जोरदार धमाका हुआ।
कुछ देर बाद एक मिनी-ट्रक निकला। उसका ड्राईवर भी चेलों को दुत्कारते हुए बिना रुके आगे चला गया। कुछ ही पल बाद फिर ब्रेकों के चीखने की आवाज़ और फिर धड़ाम।
ढक्कन गुरूजी फिर बोले, "जैसी प्रभु की इच्छा।"
अब चेलों से रहा नहीं गया और वह बोला, "ढक्कन गुरूजी, प्रभु की इच्छा तो ठीक है पर कैसा रहे यदि हम इस बोर्ड पर सीधे-सीधे लिख दें कि 'आगे पुलिया टूटी हुई है'।"
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