एक दिन घर की मुसीबत |
नगर निगम की सप्लाई
वाला पानी रोज सुबह 4 बजे से 5 बजे आता है | सर्दी में कौन ससुरा उठे | 5 बजे जब
पानी चला जाता है तो 8 बजे आता है | तब ससुरी लाइट चली जाती है | हम रोज सर्दी में
नहीं उठते, माफ़ करना कभी नहीं उठते, कौन 4 बजे उठे क्यू की हम तो पति परमेश्वर है बेचारी
पत्नी ही उठती है क्यू की वही चरणों की दासी है {ऐसा खुश करने के लिए लिख दिया है}
और हम आराम से रजाई में अपने दो बच्चो के साथ दुबके रहते है | लेकिन माँ का दुलारा
तुरंत 4.30 बजे उठ जायेगा और एक ही कविता दोहराएगा | पापा उठो मम्मी ने पानी भर
लिया | लेकिन मै और मेरी दुलारी टस से मस नहीं होते | कभी दुलारा ज्यादा कविता
दोहराने लगता है तो मन करता है की कान के नीचे दे काईदे से लेकिन सोच कर ही डर
जाता हूँ की अगर धर्मपत्नी ने रजाई में अपना ठंढा हाथ भी डाल दिया तो लेटे लेटे ही
हार्ड अटैक आ जायेगा | लेकिन सुई इस बार थोड़ी उल्टी घूम गई | अब भैया पानी भरने की
डियूटी मेरे सर पर आ गई | धर्मपत्नी जी रिश्तेदारी में जरा शादी में चली गई बच्चे
परेशान ना करें इस लिए वे हमारे पास ही रह गए | अब रोज 4 बजे कौन ससुरा पानी भरने
उठे क्यू अरे भाई पहले ही बता चूका हूँ की हम तो पति परमेश्वर है | लेकिन चरणों की दासी घर पर नहीं है | तो सुबह उठे और
तो पता चला की रत में जो पानी भरा था वो तो बहुत ठंढा है इस लिए फ्लस में डाल दिया
लेकिन जैसे ही डाला याद आया, की अमे ब्रश कैसे करोगे | अच्छा चलो कोई बात नहीं आज
सन्डे भी तो है | तभी मेरी पत्नी का
दुलारा आ गया पापा ब्रश करना है मैंने कहा हां बेटा बस अभी लो | बिस्तर के सिरहाने
देखा तो जग में पानी भरा था उसी से अपने चिंगू मिन्गु का मुह धुलवाया और अपना भी
धोया | लेकिन भाष नहीं सो सका क्यू अरे मिया अभी बताया ना की पानी नहीं था वो 8
बजे आयेगा | अगर ब्रश करते तो मुह कैसे धोते | बेटी तो मेरी अकलमंद है उसे कोई
समस्या नहीं नाकिन पुत्र श्री तुरंत बोले ब्रश नहीं किया | उसे इस बात का यकीन
दिलाने में 1 घंटा बीत गया की शेर ब्रश नहीं करते | खैर 8 बजे पानी आया ये तो
शुक्र था की बाल्टी लेकर ही बैठा था वरना एक बाल्टी भी नहीं मिलता | सोचा था इस
पानी में जबरदस्त पकवान बनायेगें | लेकिन फिर समस्या पुत्र श्री को नहाना है अरे
भैया अगर नहाओगे तो खाना क्या खाओगे | लेकिन नहीं | मन ही मन अपने ख्यालों में
उसकी ठुकाई पिटाई करते हुए आधी बाल्टी में पुत्र पुत्री को काग स्नान करवाया | अब
सोचा चलो किचन में चाय ही बनाया जाय फिर समस्या मम्मी तो रसोई में बिना नहाये नहीं
जाती | आप ने रसोई गन्दी कर दी | ये मेरी समझदार पुत्री की आवाज थी | ऐसा लगा जैसे
कभी कभी समझदारी भी खराब बात होती है | हमने पाला बदला बेटा मै तो झाड़ू लगाने की
सोच रहा था | मेरा इतना कहना था की पुत्र श्री तुरंत झाड़ू ले आये | मैंने बिस्पोत
किया किताब लेन को कहता हूँ तो लाने में साल भर लग जाते है और झाड़ू तुरंत आ गई |
सफाई जरुरी है उसकी बहन बोली | सर पकड़ कर झाड़ू लगानी शुरू की; भगवान का शुक्र था
पोछा भी सफाई का एक हिस्सा है किसी के दीमक में नहीं आई | वरना वो भी लगाना पड़ता |
खैर साफ सफाई के बाद चाय बिस्कुट और दोपहर में मैगी | दिन भर धमा चौकड़ी | शुक्र है
शाम को श्रीमती जी आ गई वरना मेरा तो दम ही निकल जाता \ वैसे मैंने शाम को पानी भर
लिया था | शाम को जब श्रीमती जी का फोन आया की मै आज नहीं आउंगी तो लगा अब शारीर में प्राण ही नहीं रहेगें | ये
प्रेम नहीं भैया घर संभालना बापों का काम नहीं है | मै एक दिन में एक हज़ार फाइलें
निपटा सकता हूँ; बॉस की एक लाख गाली खा सकता हूँ; आफिस आये फरियादियों से नोक झोक
कर सकता हूँ लेकिन घर और बच्चे नहीं सम्भाल सकता | मुझे चक्कर आ रहा है, लगता है,
बिहोस हो गया हूँ | तभी नरम मुलायम लेकिन ठन्डे
हाथ मेरे माथे पर पर गए तो
कम्बखत चीख निकल गई अरे भैया पानी
मत गिराओ | अरे कहाँ है पानी ये आवाज, अरे ये आवाज तो अपनी प्राणों की प्यारी की
है | अरे तुम, भाई तुमने तो कहा था आज नहीं आओगी | उन्होंने मेरे साइन पर सर रखते
हुए कहा “मेरा मन आपके बिना नहीं लगता” वैसे मेरा भी नहीं लगता | सच्ची | हाँ
मुच्ची | वैसे आज दिन भर क्या क्या किया | हम बताएगें | चिंगू मिन्गु बोले \ मै सोच रहा था की लगता है भैस पानी में
आज चली जाएगी | श्रीमती जि उन दोनों की बाते ध्यान से सुन रही थी और मेरी तरफ देख
कर मुस्करा रही है | वैसे वो मुस्कुरतें हुए बहुत अच्छी लगती है |
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