घूरना एक ऐसी क्रिया है की जब ये सामने वाले के द्वारा कि जाती है तो व्यक्ति अपने को बहुत प्रताड़ित महसूस करता है । परन्तु जब स्वम् के द्वारा की जा रही हो तो बहुत आनन्द आता है । याद है जब आइस क्रीम खा रही दीदी को घूरना कितना अच्छा लगता था । बस मुह में पानी आ जाता था और मन होता था की थोड़ी सी गिर जाये तो हम भी चख ले लेकिन गिरना तो दूर उलटे दीदी टोंक जरूर देती थी " छोटू टुकुर टुकुर मत देख नज़र लग जायेगी " उंन्हे अपने उप्र लगने वाली नज़र का डर नहीं था । उंन्हे तो इस बात का डर होता की कही छोटू के घूरने से आइस क्रीम गिर न जाये और गिर गई तो ये तुरंत कौए की तरह लपक लेगा । कभी जब दीदी के साथ मेले ढेले में जाता तो चाट की दुकानो पर चाची मामी ढेर सारी दीदी बहुत सारी बुआ को टिकिया चाट कहते देख मुह में पानी आ जाता लेकिन क्या कर सकते है हम तो घूर सकते है आई मीन देख सकते है बस । कभी कभी दीदी की सहेलियां मेरे घूरने से परेशान हो कर मेरी शिकायत कर देती की मै हमेशा घूरता रहता हूँ बस दीदी घर पहुंच कर मेरे कान ऐठ देती । माँ की डांट पड़ती सो अलग । एक बार तो कुछ ज्यादा ही डांट पड़ी मुझे तो रोना आ गया मुझे रुआंसा देख दीदी मुझे मनाने लगी मैंने बताया की मै तुम्हारी सहेलियों को नहीं घूरता मै तो बस चाट को ही देखता हूँ । इतना सुनना था की दीदी हंसी और बोली छोटू सब जानतें है की तू उंन्हे नहीं चाट पकोड़े मिठाई को घूरता है लेकिन ये बुरा लगता है लोग समझेगें की देखो छोटू को कभी खाने को ही नहीं मिला, तू अभी छोटा है ना । खैर इसी लपट परेड में कब पढाई पुरी कर कृषि बिभाग में लिपिक हो गया पता ही नहीं चला । इस बीच मेरी घूरने की आदत नहीं गई । हाँ दीदी कभी कभी कहती थी की तेरी ये आदत एक दिन बहुत महंगी पड़ेगी । क्यू की अब तू बड़ा हो गया है । बड़ा हो गया इसका क्या मतलब मैंने पूछा वो मुस्कुराई और बोली जब तू छोटा था तब की बात और थी लोग समझते थे की चाट को ही घूर रहा है अब तू बड़ा है ना अब लोग सोचेगें की तू चाट और आइस क्रीम को नहीं उसको खाने वाली को घूर रहा है । खैर मैंने इस बात पर गौर किया और सावधानी बरती । अरे सावधानी का मतलब ये नहीं की मै अब चोर नजरो से खाने पिने वाली चीजो को देखने लगा , अब तो मै ऐसी जगह जाने लगा जहां घूरने पर और छूट मिले । मतलब मै जाने लगा आइस क्रीम पार्लर , या फिर फ़ूड पार्क । बस पूछिये नहीं स्टाल और फ्रीजर में करीने से लगी सजी हुई चटपटी चीजो को जी भर कर घुरिये । कोई नहीं रोकेगा । हा कभी कभी अटेंडेंट आ कर जरूर पूछता था की सर क्या कुछ नया ट्राई करेंगे । कभी कभी मुफ्त में चखने को भी मिल जाता था । कसम ढक्कन वाले गुरु जी की मजा आ था । हमने तो सोच रखा था की नौकरी करेंगे तो ऐसी ही किसी जगह जैसे की पारले , कैडबरी , ब्रिटानिया , नस्ले आदि आदि । अब इन कम्पनियों में नौकरी चाहिए तो कृषि में स्नातक, या फिर रसायन कृषि में स्नातक , या फिर फूड इंडस्ट्री से रिलेटेड कोई कोर्श । हमने भी किया बायो केमिट्री में स्नातक अप्लाई भी किया सलेक्सशन भी हुआ लेकिन तभी पिता जी चिल्लाये क्या चाकलेट टाफी की कम्पनी में काम करोगे । खाद बनाने वाली कंपनी में जगह निकल रही है फार्म भरो तैयारी करो और बन जाओ बाबू । मरता क्या न करता । फार्म लेने गया तो पता चला बाप जान पाहिले ही ले आये है हम पहुंचे पापा जी लाइए फारम भर दे तो ज्यात हुआ फारम भर दिया गया है हम खिसियाए अब आप सब जमा भी कर दो । बाप जान घूरे वो भी हो गया है अब तुम तैयारी करो बस । परीक्षा का दिन आया । देकर आये कसम से पहली बार में ही क्लियर हो गया । इंटरव्यू में सलेक्शन भी हो गया । रिजल्ट देख कर मै सर पकड़ कर बैठ गया की गोया लोग क्यू कहते है की बड़ी तैयारी करनी पड़ती है सलेक्शन के लिए । लेकिन घुरण परम्परा मैंने बंद नहीं की । दीदी की शादी हो चुकी थी मै अब मामा बन गया था । एक दिन खबर मिली की दीदी की ननद की शादी है जाने की जरा भी इच्छा नहीं थी क्यू की अपने शहर में भारतीय व्यंजनो पर मेला लगा था जीभ लपलपा रही थी की वज्रपात हो गया । चलो शादी में । शायद इसी को कहते है बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना । शादी मै पहुंचे बारात आई मेरा तो मन था की जल्दी से वहां पहुचु जहां स्टाल लगा है लेकिन घराती था इस लिए अपनी बारी का इंतजार किये जा रहा था और स्टाल पर बढ़ती भीड़ को घूर रहा था डर था कहीं सब खत्म न हो जाये अरे खाना नहीं यार रसगुल्ले आइस क्रीम मिठाई इमरती डेजर्ट सब खाए जा रहे थे हमें कोई पूछ नहीं रहा था हम बस अपने भांजे को गोंद में लिए बैठे थे और स्टालों को घूरे जा रहे थे । तभी हमारी दीदी आई और बोली चिंता मत कर तेरे लिए बचा कर रखा है और भांजे को उठा कर साथ में आई एक सुकुमारी को पकड़ा दिया । मै सकपका गया लेकिन उनसे क्या छुपा था हाँ बात है उन्होंने एक बात है जो ये थी की उन्होंने फिर कहा तेरी आदत महंगी पड़ने वाली है
उस समय तो ध्यान नहीं दिया । लेकिन जब एक महीने बाद मेरी शादी को लेकर माँ अचानक बोली सुन छोटू अब मुझसे घर का काम नहीं होता तेरे लिए बहुरिया पसंद कर दी है उन्होंने ये बात ऐसे कही जैसे मै 8 - 10 सालो से शादी के लिए मना कर रहा हूँ
कसम से जब लड़की की फोटो देखि तो पता चला की दीदी ने ये क्यू कहाँ था की तेरी घूरने की आदत महगी पड़ने वाली है ये वही सुकुमारी है जिसे हमारी दीदी ने भांजे को हमारी गोंद से उठा कर पकड़ाया था ।
तो आज जब हमारी शादी होने जा रही है सब कह रहे है चाट पकोड़े बंद आइस क्रीम बंद मिठाई बंद चटर पटर बंद और मै सिर्फ ये कहना चाहता हु सब से की कृपा करके इतनी बड़ी सजा ना दे ये तो बहुत महगीं है
उस समय तो ध्यान नहीं दिया । लेकिन जब एक महीने बाद मेरी शादी को लेकर माँ अचानक बोली सुन छोटू अब मुझसे घर का काम नहीं होता तेरे लिए बहुरिया पसंद कर दी है उन्होंने ये बात ऐसे कही जैसे मै 8 - 10 सालो से शादी के लिए मना कर रहा हूँ
कसम से जब लड़की की फोटो देखि तो पता चला की दीदी ने ये क्यू कहाँ था की तेरी घूरने की आदत महगी पड़ने वाली है ये वही सुकुमारी है जिसे हमारी दीदी ने भांजे को हमारी गोंद से उठा कर पकड़ाया था ।
तो आज जब हमारी शादी होने जा रही है सब कह रहे है चाट पकोड़े बंद आइस क्रीम बंद मिठाई बंद चटर पटर बंद और मै सिर्फ ये कहना चाहता हु सब से की कृपा करके इतनी बड़ी सजा ना दे ये तो बहुत महगीं है
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