Tuesday, 17 November 2015

अरे ये तो जम गया

श्री अशोक चक्रधर जी की लेखनी 

ठोकर खाकर हमने
जैसे ही यंत्र को उठाया,
मस्तक में शूं-शूं की ध्वनि हुई
कुछ घरघराया।
झटके से गरदन घुमाई,
पत्नी को देखा
अब यंत्र से
पत्नी की आवाज़ आई-
मैं तो भर पाई!
सड़क पर चलने तक का
तरीक़ा नहीं आता,
कोई भी मैनर
या सली़क़ा नहीं आता।
बीवी साथ है
यह तक भूल जाते हैं,
और भिखमंगे नदीदों की तरह
चीज़ें उठाते हैं।
....इनसे
इनसे तो
वो पूना वाला
इंजीनियर ही ठीक था,
जीप में बिठा के मुझे शॉपिंग कराता
इस तरह राह चलते
ठोकर तो न खाता।
हमने सोचा-
यंत्र ख़तरनाक है!
और ये भी एक इत्तेफ़ाक़ है
कि हमको मिला है,
और मिलते ही
पूना वाला गुल खिला है।

और भी देखते हैं
क्या-क्या गुल खिलते हैं?
अब ज़रा यार-दोस्तों से मिलते हैं।
तो हमने एक दोस्त का
दरवाज़ा खटखटाया
द्वार खोला, निकला, मुस्कुराया,
दिमाग़ में होने लगी आहट
कुछ शूं-शूं
कुछ घरघराहट।
यंत्र से आवाज़ आई-
अकेला ही आया है,
अपनी छप्पनछुरी,
गुलबदन को
नहीं लाया है।
प्रकट में बोला-
ओहो!
कमीज़ तो बड़ी फ़ैन्सी है!
और सब ठीक है?
मतलब, भाभीजी कैसी हैं?
हमने कहा-
भा...भी....जी
या छप्पनछुरी गुलबदन?
वो बोला-
होश की दवा करो श्रीमन्‌
क्या अण्ट-शण्ट बकते हो,
भाभीजी के लिए
कैसे-कैसे शब्दों का
प्रयोग करते हो?
हमने सोचा-
कैसा नट रहा है,
अपनी सोची हुई बातों से ही
हट रहा है।
सो फ़ैसला किया-
अब से बस सुन लिया करेंगे,
कोई भी अच्छी या बुरी
प्रतिक्रिया नहीं करेंगे।

लेकिन अनुभव हुए नए-नए
एक आदर्शवादी दोस्त के घर गए।
स्वयं नहीं निकले
वे आईं,
हाथ जोड़कर मुस्कुराईं-
मस्तक में भयंकर पीड़ा थी
अभी-अभी सोए हैं।
यंत्र ने बताया-
बिल्कुल नहीं सोए हैं
न कहीं पीड़ा हो रही है,
कुछ अनन्य मित्रों के साथ
द्यूत-क्रीड़ा हो रही है।
अगले दिन कॉलिज में
बी०ए० फ़ाइनल की क्लास में
एक लड़की बैठी थी
खिड़की के पास में।
लग रहा था
हमारा लैक्चर नहीं सुन रही है
अपने मन में
कुछ और-ही-और
गुन रही है।
तो यंत्र को ऑन कर
हमने जो देखा,
खिंच गई हृदय पर
हर्ष की रेखा।
यंत्र से आवाज़ आई-
सरजी यों तो बहुत अच्छे हैं,
लंबे और होते तो
कितने स्मार्ट होते!
एक सहपाठी
जो कॉपी पर उसका
चित्र बना रहा था,
मन-ही-मन उसके साथ
पिकनिक मना रहा था।
हमने सोचा-
फ़्रायड ने सारी बातें
ठीक ही कही हैं,
कि इंसान की खोपड़ी में
सैक्स के अलावा कुछ नहीं है।
कुछ बातें तो
इतनी घिनौनी हैं,
जिन्हें बतलाने में
भाषाएं बौनी हैं।

एक बार होटल में
बेयरा पांच रुपये बीस पैसे
वापस लाया
पांच का नोट हमने उठाया,
बीस पैसे टिप में डाले
यंत्र से आवाज़ आई-
चले आते हैं
मनहूस, कंजड़ कहीं के साले,
टिप में पूरे आठ आने भी नहीं डाले।
हमने सोचा- ग़नीमत है
कुछ महाविशेषण और नहीं निकाले।

ख़ैर साहब!
इस यंत्र ने बड़े-बड़े गुल खिलाए हैं
कभी ज़हर तो कभी
अमृत के घूंट पिलाए हैं।
- वह जो लिपस्टिक और पाउडर में
पुती हुई लड़की है
हमें मालूम है
उसके घर में कितनी कड़की है!
- और वह जो पनवाड़ी है
यंत्र ने बता दिया
कि हमारे पान में
उसकी बीवी की झूठी सुपारी है।
एक दिन कविसम्मेलन मंच पर भी
अपना यंत्र लाए थे
हमें सब पता था
कौन-कौन कवि
क्या-क्या करके आए थे।

ऊपर से वाह-वाह
दिल में कराह
अगला हूट हो जाए पूरी चाह।
दिमाग़ों में आलोचनाओं का इज़ाफ़ा था,
कुछ के सिरों में सिर्फ
संयोजक का लिफ़ाफ़ा था।

ख़ैर साहब,
इस यंत्र से हर तरह का भ्रम गया
और मेरे काव्य-पाठ के दौरान
कई कवि मित्र
एक साथ सोच रहे थे-
अरे ये तो जम गया!

जो बीत गई सो बात गई

श्री हरिवंशराय बच्चन  जी की एक कविता 

जो बीत गई सो बात गई

जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
वह डूब गया तो डूब गया
अम्बर के आनन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
जो छूट गए फिर कहाँ मिले
पर बोलो टूटे तारों पर
कब अम्बर शोक मनाता है
जो बीत गई सो बात गई


जीवन में वह था एक कुसुम
थे उसपर नित्य निछावर तुम
वह सूख गया तो सूख गया
मधुवन की छाती को देखो
सूखी कितनी इसकी कलियाँ
मुर्झाई कितनी वल्लरियाँ
जो मुर्झाई फिर कहाँ खिली
पर बोलो सूखे फूलों पर
कब मधुवन शोर मचाता है
जो बीत गई सो बात गई

जीवन में मधु का प्याला था
तुमने तन मन दे डाला था
वह टूट गया तो टूट गया
मदिरालय का आँगन देखो
कितने प्याले हिल जाते हैं
गिर मिट्टी में मिल जाते हैं
जो गिरते हैं कब उठतें हैं
पर बोलो टूटे प्यालों पर
कब मदिरालय पछताता है
जो बीत गई सो बात गई

मृदु मिटटी के हैं बने हुए
मधु घट फूटा ही करते हैं
लघु जीवन लेकर आए हैं
प्याले टूटा ही करते हैं
फिर भी मदिरालय के अन्दर 
मधु के घट हैं मधु प्याले हैं
जो मादकता के मारे हैं
वे मधु लूटा ही करते हैं
वह कच्चा पीने वाला है
जिसकी ममता घट प्यालों पर
जो सच्चे मधु से जला हुआ
कब रोता है चिल्लाता है
जो बीत गई सो बात गई

पति और पत्नी का सामजस्य


पति: डार्लिंग कल सुबह क्या तुम मेरे साथ योग क्लास में चलना चाहोगी?

पत्नी: तुम कहना क्या चाहते हो, मैं क्या मोटी हो गयी हूँ?

पति: अरे ऐसी बात नहीं है, नहीं जाना चाहती तो मत चलो।

पत्नी: तुम्हारा मतलब मैं आलसी हूँ।

पति: तुम ऐसे गुस्सा क्यों कर रही हो?

पत्नी: अब तुम्हें लग रहा है कि मैं हमेशा झगड़ती रहती हूँ।

पति: अरे मैंने ऐसा कब बोला?

पत्नी: अच्छा, मतलब अब मैं झूठ बोल रही हूँ।

पति: अच्छा बाबा, मैं भी नहीं जाता।

पत्नी: अब समझी मैं, दरअसल तुम खुद मुझे ले जाना नहीं चाहते थे और अब बहाने बना रहे हो। तुम्हारा तो हमेशा से यही काम है। सारी गलती मेरी ही है।

पत्नी बस लगातार पति को कोसती रही और पति बेचारा चुपचाप बैठा सारी रात यह सोचता रहा कि आखिर उसने ऐसा क्या पूछ लिया जो उसकी यह हालत कर दी गयी।

Sunday, 15 November 2015

माननीय प्रधान सेवक को मेरे मन एवं आत्म विश्लेषण के सन्दर्भ मे



सेवा में,
श्रीमान प्रधान सेवक जी
भारत सरकार
152, साउथ ब्लाक,
रायसीना हिल
नई दिल्ली -110011.

विषय : मेरे मन एवं आत्म विश्लेषण के सन्दर्भ में |

आदरणीय परम श्रद्धेय मोदी जी,
      सादर प्रणाम; इस पत्र के माध्यम से सर्व प्रथम मै आपको बताना चाहता हूँ की मै तक़रीबन 7 माह से आप को पत्र लिखना चाहता था; परन्तु कुछ हिचक एवं स्वम् के दृष्टीकोण में भ्रम की स्थिति के कारण मै इसे लिख नहीं सका | पत्र के शुरुआत में सर्व प्रथम बधाई,  भारतीय जनता पार्टी ने बिहार में सर्वाधिक 28.35% मतों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई, जबकि दूसरी तरफ के दो मुख्य प्रतिद्वंदी  क्रमशः 16 % जदयू 18 % आर जे डी ने मत प्राप्त किये | ये दीगर बात है, की दोनों का मिलाप बहुमत के पक्ष में है वही भारतीय जनता पार्टी के अलावा उसके किसी भी सहयोगी दल ने उल्लेखनीय प्रदर्शन नहीं किया | बिहार चुनावों के दरमियान मै कार्यालय के कार्य से पटना में ही था और मैंने अनुभव किया की अगर भारतीय जनता पार्टी स्वतंत्र होकर ये चुनाव लडती तो पार्टी आसानी से 110 सीटें जीत सकती थी | जैसा की अक्सर होता है की पराजय के उपरान्त हर कोई आत्म विश्लेषण करता है की वो क्यू इन विपरीत परिस्थितियों में पंहुचा; ध्यान देने की बात ये है की मै यहाँ हार- जीत की  बात नहीं कर रहा हूँ |भारतीय जनता पार्टी से मेरा कोई घनिष्ट लगाव नहीं रहा और ना ही मै इसका कोई कर्मठ कार्यकर्ता ही हूँ | बचपन में मेरे घर के सामने बने हुए पार्क में कुछ लोग खाकी की हाफ पैन्ट एवं सफ़ेद कमीज में सुबह व्ययाम करने आते और उनके हाथों में लाठियां होती | मुझे नहीं पता वो कौन थे, अब इसे सयोंग कहे या कुछ और एक दिन एक बुजुर्ग ने मुझे वहां बुलाया और मुझे समूह के साथ व्ययाम करने की सलाह दी | मै किस दिन से वहां गया मुझे पता नहीं, याद नहीं आता, परन्तु मुझे अच्छी तरह से याद है, की सर्वप्रथम गायत्री मन्त्र का उच्चारण मैंने वहीँ किया एवं उसे सीखा | हम समूह में रोज व्ययाम करते , लाठियों से कुछ करतब करते और अंत में सावधान होकर दायें हाथ के अगुंठे को सीने से लगा कर प्रतिज्ञा करते | कालांतर में पिताजी के स्थानान्तरण की वजह से समूह छुट गया और अन्त तक मुझे ये पता नहीं चल पाया की वह किस संगठन का समूह था | स्थानान्तरण के बाद उत्तर प्रदेश में आने के काफी समय बाद मुझे (तब मै शायद हाई स्कूल में रहा हूँगा) उस संगठन के बारे में पता चला जिसे हम राष्ट्रिय स्वम सेवक संघ के नाम से जानते है | हालांकि की उ०प्र० में कभी मै संगठन में शामिल नहीं हुआ और ना ही संपर्क करने की कोशिश की | तब से अब तक मैंने संगठन से जुड़े कई लोगों एवं उसकी इकाईयों में उतार चढाव देखे इन में से एक भारतीय जनता पार्टी भी है | मैंने आदरणीय कल्याण सिंह की सरकार को जाते, आदरणीय राजनाथ सिंह जी की सरकार को बनते बिगड़ते देखा | केंद्र में आदरणीय अटल जी की कार्यशैली देखी और आप को भारतीय जनता पार्टी के क्षितिज पर उभरते हुए देखा | आगे आप देश के प्रधान सेवक बने और देश को भ्रम त्यागते हुए आत्म निर्भर बनते हुए भी देखा | सब अच्छा था और आज भी सब अच्छा है कम से कम मै तो यही मानता हूँ | फिर भी भारतीय जनता पार्टी ने दो चुनावों में (दिल्ली एवं बिहार) में पार्टी की पकड़ मतदाताओं पर कम हुई | ऐसा क्यू है; इसका आत्म चिंतन तो आप सब ने किया ही होगा; मैंने भी किया है, यहाँ बिन्दुवार विश्लेषण एवं त्रुटियाँ प्रस्तुत है :- 

      1)      हिन्दू
यहाँ मै सबसे पहले हिन्दू के बारे में बात करना चाहता हूँ | वर्तमान में हिन्दू क्या सोचता है | क्या आप की पार्टी के नेताओं या कार्यकर्ता ने सोचा है कभी | मै बताता हूँ एक आम हिन्दू शांतिपूर्ण तरीके में भरोसा करता है , उसका अपना एक परिवार है, उसके बच्चे है, माता पिता है, रोज सुबह भगवन को याद करके वह काम पर निकलता है, काम करता है, पैसे लाता है, घर के खर्च पूरा करता है, खाना खाता है, और सो जाता है | इस ख्याल से की अगली सुबह वो फिर उठेगा अपने परिवार एवं बच्चो के लिए | उसकी आँखों में एक सपना है, अपने बच्चो के लिए उनके सुनहरे भविष्य के लिए | उसका मंदिर उसके घर में है | आपके पैतृक घर में भी होगा ऐसा मेरा विश्वास है | पिछले  एक साल से मै ये देख रहा हूँ, की भारतीय जनता पार्टी के कुछ क्षदम नेता हिन्दुओं को डरा रहे है | कभी मंदिर के नाम पर, कभी हिंदुत्व के नाम पर, कभी बीफ के नाम पर, तो कभी मुसलमानों के नाम पर | अगर आप की पार्टी के क्षदम नेताओं को ये लगता है की हिन्दुओं को डरा कर संगठित कर लेंगे तो मै आप को साफ एवं स्पष्ट तौर पर बता दूँ की ऐसा नहीं हो पायेगा | क्यूकी हिन्दू लड़ने से के बजाय ताकतवर होना पसंद करेगा और ये तभी होगा जब वो विकास की मुख्य धरा में जोड़ दिया जायेगा | डार्विन का सिद्धांत है उपार्जित लक्षणों की वंशागति; जो विकसित  होगा वही रहेगा बाकि सब समाप्त | भारतीय जनता पार्टी के क्षदम नेताओं ने विकास के लिए क्या किया | कभी उन से आप ने या माननीय अध्यक्ष  जी ने पुछा | वे कई वर्षो से एक ही संसदीय क्षेत्र से लड़ रहे है एवं जीत रहे | उन्होंने अपने क्षेत्र में कितना विकास किया सिवाय हिन्दुओं को डराने के | उनके क्षेत्र में हिन्दू कितने ताकतवर हुए | कहने को उन्होंने केसरिया वस्त्र पहन रखा है, लेकिन उन्होंने सनातन धर्म के किन नियमों का पालन अब तक किया | जहाँ तक मै समझता हूँ ये ना तो धर्म के ही हुए और ना  ही भारतीय जनता पार्टी के | पार्टी के सिद्धांतो का सत्यानाश करने में इन्होने कोई कसर नहीं छोड़ी | इन्होने हिन्दुओं को तोडा, उन्हें डराया, और अपना उल्लू सीधा किया | उपर से घमंड इतना की इनकी वजह से ही भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीतती है | लेकिन सच ये है की एक बार इनके पास से भारतीय जनता पार्टी का लेबल हटा दिया जाये तो ये कभी भी अपने मोहल्ले का वोट भी नहीं पा सकेंगे | मैंने अनुभव किया है आज हिन्दुओं को मुख्य धारा से जोड़ना है और अगर सारे हिन्दू विकास के छाते के नीचे आ गए तो ये राष्ट्र को नई उचाईयों पर ले जा सकते है | हिन्दुओं ने सदियों से परिस्थितियों के अनुसार अपने को बदला है और ताकतवर होकर उभरे है ऐसी योजना बनाइये की सरे हिन्दू उससे जुड़े ना की बेफजूल की बयानबाजी को सुनकर ये सोचे की यार इससे तो अच्छा पाहिले ही था | बिहार में पराजय का ये सबसे बड़ा कारण था की भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने ऐसी कोई कोशिश ही नहीं की और क्षदम हिन्दू नेताओ ने हिन्दुओ को अपनी बिना काम की बयानबाजी से तोडा और डराया |

      2)      विकास
जब हम विकास की बात करते है तो आपकी सरकार ने कई उल्लेखनीय कार्य किये है एवं कई मोर्चो पर देश को मजबूती के साथ विश्व पटल पर पहचान मिली है, परन्तु भारतीय जनता पार्टी
के कितने सांसदों और कुछ केन्द्रीय मंत्री को छोड़ कर शेष को इन कार्यों के बारे में पता है और सबसे महत्वपूर्ण कितने सांसदों ने सीधे तौर पर जनता से इन योजनाओ, कार्यों को लेकर सवांद किया है, या कितनो ने इन कार्यों या योजनाओ में हुई त्रुटियों के बारे में आप से या सम्बंधित विभाग से बात की है | मै यहाँ लखनऊ में हूँ और आज तक मै किसी नेता या मंत्री की सभा में नहीं गया और ना ही उनको प्रत्यक्ष बोलते सुना है | फिर भी शपथ पूर्वक कह सकता हूँ एक भी नहीं, क्षदम हिन्दू नेताओ की तो बात ही छोड़ दीजिये | उन्हें तो अपना पेट भरने से ही फुर्सत नहीं है | मै अक्सर न्यूज़ चैनल पर होने वाले डिबेट को देखता हूँ, कुछ एक को छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी के सभी प्रवक्ताओं में आत्म विश्वास की घोर कमी होती है | ऐसा सिर्फ और सिर्फ विषयवस्तु की जानकारी ना होने के कारण होता है | यदि आप एक परीक्षा का आयोजन करे एवं सभी सांसदों से केंद्र सरकार के किये हुए कार्यों के बारे में पूछे तो भारतीय जनता पार्टी अधिकतर नेता तो क्षेत्र में अधिक कार्य होने का बहाना बनायेगे और जो परीक्षा में समिलित होंगे वे निश्चित रूप से असफल हो जायेंगे | जब भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को ही  सरकार के द्वारा अर्जित की गई उपलब्धियों के बारे में नहीं पता तो वे आम आदमी को क्या बता पायेगें | ये बिहार में पराजय का दूसरा बड़ा कारण है  |

3    3)      मोदी बनाम राज्य सरकार
मैंने देखा है जब से केंद्र में आप आये है | तब से कही भी किसी भी राज्य में चुनाव होता है तो भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की वजह से चुनाव मोदी बनाम राज्य सरकार हो जाता है | मुझे लगता है की ये या तो जानबुझ कर किया जाता है या फिर भारतीय जनता पार्टी की राज्य इकाइयों के पास ऐसा नेता नहीं है जो राज्य चुनाव में पार्टी का नेतृत्व कर सके | दोनों ही बातें भारतीय जनता पार्टी के भविष्य के लिए खतरनाक है | हर बार मोदी ही चुनाव क्यू लड़े बाकि नेता क्या संसदीय निधि या विधायक निधि ही लेगें | उनकी जबाबदेहि कब सुनिश्चित होगी | जब पार्टी के नेताओं का ये हाल है तो फिर क्षदम हिन्दू नेताओं का तो क्या कहना | ये बिहार में पराजय का तीसरा बड़ा कारण है |

4)      चुनावी घोषणा
चुनाव के दौरान जो घोषणा भारतीय जनता पार्टी करती है उस पर पहले मंथन होना चाहिए; कही ऐसा न हो की जो घोषणा पार्टी कर रही है; उसको जनता अस्वीकार कर दे या उसे ये छलावा मात्र लगे और घोषणाओं का कोई असर देखने को ही ना मिले | जैसा की बिहार चुनाव में हुआ |

      5)      घर का भेदी / मौका परस्त नेता
भारतीय जनता पार्टी के साथ ये सब से बड़ी समस्या है | पार्टी में कई ऐसे नेता है जो विरोधियों का प्रचार तो नहीं कर रहे है, परन्तु आतंरिक तौर पर अपने बयानों एवं कार्यों से जनता में गलत संदेश दे रहे हैं | उनके बयानों से एवं कार्यों से आम आदमी भ्रमित हो रहा है | जबकि उनका खुद का भविष्य भारतीय जनता पार्टी पर निर्भर है | ये बात वो अच्छी तरह से जानते है | चुनाव के समय बहुत सारे नेता अपनी पार्टी छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो जाते है और पार्टी प्रवक्ता बड़े गर्व से कहते है फला नेता के आने से पार्टी का जनाधार बढेगा और मजबूती मिलेगी | कॉमन सोच ये है, की अगर फला नेता के पास जनाधार है तो वो अपनी पार्टी छोड़ कर क्यू आया | क्यू की जिस नेता का जनाधार होता है;  उसे पार्टी कभी नहीं छोड़ना चाहती | इस सम्बन्ध में श्री राम चरित मानस की घटना आपको याद होगी | विभीषण जी श्री राम जी के अनन्य भक्त थे एवं उन्होंने धर्म का साथ दिया था, परन्तु समाज में उन्हें घर का भेदी लंका ढाए कह कर अपमानित किया जाता है | जबकि दूसरी घटना में रावण ने अपने दूतों को वानर बना कर श्री राम जी की सेना का गुप्त भेद पता करने के लिए भेजा और लक्ष्मण जी एवं वानरों के द्वारा वे सभी पकडे गए | मुझे बताइए भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ताओं या नेताओं मे घर के भेदी के खिलाफ कार्यवाही या शिकायत करने की क्षमता है या क्या शीर्ष नेता इतने काबिल है की वो परस्थितियों के हिसाब से कार्यवाही कर पा रहे है जब वे विपरीत परिस्थितियों को देख समझ ही नहीं पाते तो रावण के दूतों को कैसे पहचानेगें | बाहर से आये हुए नेता सिर्फ और सिर्फ क्षेत्रीय कार्यकर्ता का मनोबल तोड़ते है | वे मौका परस्त होते है चुनाव के समय ऐसे मौका परस्त ना तो पार्टी का भला कर सकते है और ना ही क्षेत्र का | क्यू की वे गलत मनसा से अपनी पार्टी छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी में आते है तो पार्टी का जनाधार गिरा देतें है वे अपने साथ भ्रष्टाचार के आरोप प्रत्यारोप लाते है | जब वे अपनी पार्टी में होते है तो भारतीय जनता पार्टी को जी भर कर गालियाँ देते है और चुनाव आने पर चुनावी समीकरण बैठा कर पार्टी बदल लेते है | आप गौर करे बिहार चुनाव में जितने भी नेता भारतीय जनता पार्टी में समिलित हुए उन्होंने पार्टी की जीती हुई सीटों पर क्या योगदान दिया | शून्य | बल्कि जब वे अपनी पार्टी से भारतीय जनता पार्टी में आये तो उनकी और अपनी पार्टी में कोई अन्तर ही नहीं दिखा | ऐसा लगता था की जैसे हर तरफ जदयू या आर जे डी ही चुनाव लड़ रही है और उन्हें टिकट भी दिया गया | कभी आप सब ने गौर किया की पार्टी का कर्मठ कार्यकर्ता इस तरह की की घटना से अपने को छला हुआ महसूस करता है | उसका अधिकार किसी मौका परस्त को दे दिया जाता है और पार्टी प्रवक्ता और शीर्ष नेता अपने को महान बताने और एक दुसरे की पीठ थपथपाने में लगे रहते है

      6)      क्षेत्रीय समस्याओ की कोई जानकारी नहीं
भारतीय जनता पार्टी के तक़रीबन किसी भी नेता को क्षेत्रीय समस्याओ का ज्ञान नहीं है और ना ही जनता से उनका संवाद है | वे जिस जगह से चुनाव लड़ रहे है वहां की प्रमुख समस्याओं को उठाने के बजाय वे मोदी जी के नाम पर वोट मांगने लगते है | क्यू अब ये प्रश्न पुछने का वक्त आ गया है | ये नेता चुनाव को मोदी बनाम राज्य कर रहे है और जब कोई पूछता है की हम मोदी को वोट क्यू दे या मोदी ने देश के लिए क्या किया तो इनमे से किसी भी नेता को जवाब नहीं पता और वे अपनी बगलें झाकने लगते है |

      7)      आत्म विश्वास की कमी एवं अर्मादित भाषा का प्रियोग
भारतीय जनता पार्टी के क्षेत्रीय नेताओ में आत्म विश्वास की घोर कमी है | वे ना तो आगे बढ़ कर नेतृत्व करना चाहते है | पार्टी के कई नेता अर्मादित भाषा का लगातार प्रियोग करते है जिससे हिन्दुओं का मनोबल लगातार टूट रहा है क्यू की हिन्दू अर्मादित नहीं होना चाहता | इस पर आप को तुरंत रोक लगानी पड़ेगी | सरकार के अच्छे कार्यो का बखान करने का तो समय नहीं है लेकिन अर्मादित भाषा का प्रियोग करने का पूरा समय है| इसमें पार्टी के क्षदम हिन्दू नेताओ का पूरा योगदान है | ये सभी भारतीय जनता पार्टी को रसातल में ले जा रहे है |

उपरोक्त समस्याओ को दूर करने की जरुरत है नहीं तो आगमी होने वाले चुनाव जो की किसी भी राज्य से सम्बंधित है भारतीय जनता पार्टी के लिए बहुत बुरा दौर होगा और मै नहीं जनता आप को कैसा लगेगा, लेकिन सच बताऊँ मुझे बहुत बुरा लगेगा |

और अंत में, उ०प्र० में निकट भविष्य में विधानसभा के चुनाव होने है | परन्तु कुछ एक क्षेत्रीय नेताओं को छोड़ कर सभी मोदी के नाम पर बैठे है | उनके पास ना तो कोई दूरदृष्टि है और ना ही भविष्य की कोई योजना | अगर ऐसा ही रहा तो उ०प्र० में भी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा, क्यू की यहाँ बहुजन समाजवादी पार्टी के साथ भारतीय जनता पार्टी का कड़ा मुकाबला हो सकता है | उ०प्र० की जनता वर्तमान में BSP और भारतीय जनता पार्टी की बीच तुलनात्मक अन्तर खोज रही है | बुरा ये होने जा रहा है की उ०प्र०में भी भारतीय जनता पार्टी  के खिलाफ भी महागठबन्धन होने जा रहा है | यदि ये गठबंधन आम आदमी को ये समझाने में कामयाब हो गया की भारतीय जनता पार्टी के शासन में शांति नहीं रहेगी और उ०प्र० में निरन्तर अवरोध रहेगा तो भारतीय जनता पार्टी के लिए एक नई परेशानी शुरू हो जाएगी और आप को अब तक इस बात का अहसास तो हो ही गया होगा की उ०प्र० इकाई में अभी कोई ऐसा नेता नहीं है जो इन समस्याओं से पार्टी को निकाल सके और जो एक आधा है भी तो उन्हें शीर्ष नेताओं का सहयोग नहीं है | अच्छा तो यह होगा की भारतीय जनता पार्टी उ०प्र० में बिना भावी मुख्यमंत्री की घोषणा किये, किसी अच्छे चरित्र वान, तेज स्वाभाव एवं भ्रष्टाचार से दूर रहने वाले नेता को आगे करे और उसके नेतृत्व में योजना बनाये और वर्तमान सरकार  को घेरने की कोशिश करे | इस देश को मोदी की जरुरत है; लेकिन ये तभी हो पायेगा जब हिन्दू संगठित होंगे और ये तब होगा जब भारतीय जनता पार्टी के क्षदम हिन्दू नेताओं पर रोक लगेगी और घर के भेदी के साथ बाहर से आये तथाकथित बड़े जनाधार वाले नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया जायेगा |
यदि पत्र में मैंने कोई दृढ़ता या मन को दुखाने वाली कोई बात की हो तो इसके लिए मै क्षमा चाहूँगा|  आपके दीर्ध आयु एवं स्वस्थ जीवन की कामना के साथ माँ भारती की प्रगति के लिए
जय भारत, जय सनातन धर्म |
                                                     

   आपका  शुभस्नेही  
                                               

                                                           दीप कुमार दुबे  
                                                       बी- 18 सेक्टर –एच, अलीगंज
                                                         लखनऊ -226024
                                                           मो०-7379495932