कैरियर के झूठ के कितने रूप हैं..
हम कितने झूठ अपने आप से बोलते हैं.. कभी गिनती नहीं होती
क्या 12वी के बाद जो करियर हमने चुने वो हमारी अपनी मर्ज़ी से थे..
खुशकिस्मत रहे वो जिन्हे गाइड करने वाले थे..
हम कितने झूठ अपने आप से बोलते हैं.. कभी गिनती नहीं होती
क्या 12वी के बाद जो करियर हमने चुने वो हमारी अपनी मर्ज़ी से थे..
खुशकिस्मत रहे वो जिन्हे गाइड करने वाले थे..
एवरेज मार्क्स के बाद एंटरेंस में फेल होने के बाद..
कोचिंगों के तीरथ इलाहबाद भेजे गए.
जैसे तैसे साल कटा..
और फिर एंटरेंस में फेल हुए..
कोचिंगों के तीरथ इलाहबाद भेजे गए.
जैसे तैसे साल कटा..
और फिर एंटरेंस में फेल हुए..
जो पास हुए थे उनके फोटो अख़बारों में छपे..
जो क्वालीफाई नहीं कर पाये उन्हें उनके हाल पे छोड़ दिया गया. उनमे मै भी था .
जो क्वालीफाई नहीं कर पाये उन्हें उनके हाल पे छोड़ दिया गया. उनमे मै भी था .
लेकिन जस्ट बिकॉज़ सोशल स्टेटस मेंटेन करना था..
तो एडमिशन भी हो गया..कुकुरमुत्तों की तरह उग आये मैनेजमेंट के कॉलेजों में..
जैसे तैसे पास हुए ..और स्किल के नाम पे "अंग्रेजी गाने सुनना" और कुछ हॉलीवुड फिल्मों के नाम भी याद हो गए..
तो एडमिशन भी हो गया..कुकुरमुत्तों की तरह उग आये मैनेजमेंट के कॉलेजों में..
जैसे तैसे पास हुए ..और स्किल के नाम पे "अंग्रेजी गाने सुनना" और कुछ हॉलीवुड फिल्मों के नाम भी याद हो गए..
दिमाग में चढ़ी धुंध में सपने और भी धुंधले होते गए..
कंपनियां कब आई कब चली गयी किसको लेके गईं कुछ पता नहीं चला..
कंपनियां कब आई कब चली गयी किसको लेके गईं कुछ पता नहीं चला..
जिनके प्लेसमेंट हुए उन्होंने कॉर्पोरेट प्रोफेशनल, MNC वर्ल्ड जैसी कम्युनिटी ज्वाइन कर लीं ऑरकुट पे.
और बाकी की हिम्मत नहीं हुई कॉलेज के बाद घर लौटने की.उनमे मै भी था .
और बाकी की हिम्मत नहीं हुई कॉलेज के बाद घर लौटने की.उनमे मै भी था .
ऑफ कैंपस इंटरव्यू की तैयारी के नाम पे ट्विन शेयरिंग से..4 लोगों के साथ कमरा शेयर करने के हालात बन गए थे ..
और 5 - 6 महीने इधर उधर के दोस्तों..दोस्तों के बड़े भाइयों को रिज्यूमे भेज भेज के दिन बीतने के साथ और उदासी में डूबता गया ..
और 5 - 6 महीने इधर उधर के दोस्तों..दोस्तों के बड़े भाइयों को रिज्यूमे भेज भेज के दिन बीतने के साथ और उदासी में डूबता गया ..
फिर जैसे तैसे साल भर के गैप के बाद एक नौकरी मिली..परिवार मै सभी खुस थे जैसे बेटे ने नोबल जीता हो | शायद हाँ नोबल ही तो, बड़ी डिग्री लेने के बाद अगर आप कोई नौकरी ढूड ले तो वो किसी नोबल से कम तो नहीं है |
मै अपने आप पे खूब इतराया कि बिना जुगाड़ के प्योर अपने दम पे तुम्हे नौकरी मिली है..
मै अपने आप पे खूब इतराया कि बिना जुगाड़ के प्योर अपने दम पे तुम्हे नौकरी मिली है..
उस रात मैंने गाने सुने उस पूरी रात और गाया "यहां के हम सिकंदर"..
अब मै खुश हो चूका हूँ ..और ऑरकुट के अलावा अब फेसबुक भी आ गया हूँ ..
अपने ऑफर लेटर की स्कैन कॉपी मैने डाली फेसबुक पे सैलरी छिपा के..
और टैग किया उन सभी दोस्तों को जो ऑन कैंपस में मुझ से जीते थे और जीते थे कम्पटीशन की तैयारी में..
अपने ऑफर लेटर की स्कैन कॉपी मैने डाली फेसबुक पे सैलरी छिपा के..
और टैग किया उन सभी दोस्तों को जो ऑन कैंपस में मुझ से जीते थे और जीते थे कम्पटीशन की तैयारी में..
अब मुझे लगता है मै उनकी लीग में आ चुका हूँ ..
पर मै मन ही मन जानता था ..
कि इस तनख्वाह में भी मै ट्विन शेयरिंग का रूम भी बमुश्किल अफोर्ड कर पाउँगा..
और खायेंगे २० रुपये पर प्लेट मिलने वाला खाना सड़क किनारे लगने वाली ठेल से..
पर मै मन ही मन जानता था ..
कि इस तनख्वाह में भी मै ट्विन शेयरिंग का रूम भी बमुश्किल अफोर्ड कर पाउँगा..
और खायेंगे २० रुपये पर प्लेट मिलने वाला खाना सड़क किनारे लगने वाली ठेल से..
मै अंदर ही अंदर अब भी श्योर नहीं था..
मै कहीं न कहीं जानता था ..
कि ये कांच की बिल्डिंग धोखा है..
जहां पहले दिन मुझे बताया गया..
कि वी आर लीडर इन देट..पायनियर इन देट..
रेवेन्यू इतना बिलियन..एक्सिस्ट इन 20 कंट्रीज..
मै कहीं न कहीं जानता था ..
कि ये कांच की बिल्डिंग धोखा है..
जहां पहले दिन मुझे बताया गया..
कि वी आर लीडर इन देट..पायनियर इन देट..
रेवेन्यू इतना बिलियन..एक्सिस्ट इन 20 कंट्रीज..
लेकिन मै जनता था अपनी हकीकत- इन हैंड 8000 पर मंथ है..
मै समझने लगा हूँ कि मै उस लड़ाई को अब तक लड़ता आया हूँ जो मेरे लिए थी ही नहीं..
मै समझने लगा हूँ कि मै उस लड़ाई को अब तक लड़ता आया हूँ जो मेरे लिए थी ही नहीं..
पर यहां से लौट पाना अब मुश्किल है..
कई बार बेवजह की लड़ाइयों में हम इतने उलझ जाते हैं कि खुद को भूल जाते हैं..
कई बार बेवजह की लड़ाइयों में हम इतने उलझ जाते हैं कि खुद को भूल जाते हैं..
और अब मेरे साथ भी वही होगा जो कैब में बैठे 35 की उम्र में 55 के लगने वाले..
जोशी सर के साथ हुआ होगा..
जोशी सर के साथ हुआ होगा..
ये कहानी हम सबकी है..ये हार हम सबकी है..
बस कोशिश रहे कि हम अपने सामने किसी और को ऐसे न हारने दें..
बस कोशिश रहे कि हम अपने सामने किसी और को ऐसे न हारने दें..
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