एक बार की बात थी
तब शायद रात थी ।
मै सोया था जंगल में
शायद तब मंगल था ।
मेरे सामने आया शेर
ड़र से मैं हो गया ढेर ।
थर थर लगा कांपने
ड़र से लगा मै हांफने ।
मै बोला जाने दो मुझको'
मुझको घर दो ।
शेर बोला ना जाने दूंगा
कच्चा तुझे चबा जाऊंगा ।
हाथ जोड़ कर बोला मै
मुझको घर जाने दो ।
झट से गिरा पलंग के नीचे
रोते रोते खोली आँख ।
अरे ये तो सपना था
ऐसा सपना अब ना आना ।
अब ना आना
कभी ना आना ।
तब शायद रात थी ।
मै सोया था जंगल में
शायद तब मंगल था ।
मेरे सामने आया शेर
ड़र से मैं हो गया ढेर ।
थर थर लगा कांपने
ड़र से लगा मै हांफने ।
मै बोला जाने दो मुझको'
मुझको घर दो ।
शेर बोला ना जाने दूंगा
कच्चा तुझे चबा जाऊंगा ।
हाथ जोड़ कर बोला मै
मुझको घर जाने दो ।
झट से गिरा पलंग के नीचे
रोते रोते खोली आँख ।
अरे ये तो सपना था
ऐसा सपना अब ना आना ।
अब ना आना
कभी ना आना ।
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