Friday, 24 July 2015

इतनी जल्दी क्या है भैया जब जीना है बरसो .....................

आज दिन भर काम का बोझ रहा । बार बार लाइट जाने से काम भी रुक रहा है । समझ में नहीं आता की मै  कैसे मैनेज करू । एक तो इनकम टैक्स में सोसाइटी का केस ऊपर से २७ तक सरे डॉक्यूमेंट जमा करवाने की वार्निंग । पिछले 4 दिनों से यही सब, ये हिसाब बनाओ , वो हिसाब बनाओ । बस जिसे देखो हिसाब । शुक्र है की रिकार्ड टैली हो रहा है वार्ना रत में भी जूटो । कभी कभी लगता है छोड़ो  काम करना अब तो नेतागीरी में ही मजा है, अपने दिल्ली वाले आम आदमी के बारे में सोचता  हूँ  की ये बाँदा IRS था वहाँ  तो अकाउंट में दिन रात काम ही काम होता है फिर राजनीती , आंदोलन, भूख हड़ताल धरना के लिए समय कहाँ से निकल लेता था । मेरे सीनियर दिल्ली से ही आये है कौतूहलवश उनसे यूँही पुंछ लिया वो महान भाव दिल्ली का CM  होने के बावजूद इतनी शिकायते , ताने , धरने का समय कैसे निकलता है । भाई CM   पास काम की कमी थोड़े  है अभी उनका नया करना मै  बयां करता की मेरे सीनियर बोले काम तो गधे करते है  अक्लमंद   काम न होने के बहाने बनता है । भाई ट्विटर पर लोगो को बताओ की हमें काम नहीं करने दिया  जा रहा है  हम क्या करे , भले ही बारिश में नालियां बजबजाने लगे , भले ही सफाई कर्मचारी सैलरी ना मिलने का बहाना बना कर सफाई ना करे टीवी पर अपनी प्रशंसा का गीत जरुर बजना चाहिए तभी कल्याण होगा मैंने पूछा मैंने सुना है मेरे आम आदमी ने अपने कुनबे के बन्दे को खुश करने के लिए उसकी मोहतरमा को महिला योग का अध्यक्ष बना दिया है वो बोले अरे कई दिनों से कोई बहाना ही नहीं मिल रहा था तो अपने आम आदमी ने सोचा होगा की कही लोग भूल ना जाएँ बस फिर क्या बिना राज्यपाल को बताये ही महिला योग की अध्यक्ष बना दिया अरे वो तो बीबी का डर है वरना घर की होम मिनिस्ट्री थमा देते आखिर है तो आम आदमी ही ना । एक बात है अपना आम आदमी चतुर बहुत है जनता था हर राज्य में योग की नियुक्ति करने से पहले राज्यपाल को सूचना देना जरुरी है अगर सुचना ना दो तो नियुक्ति अवैध बस फिर क्या अपना काम तो हो गया मिल गया काम ना करने का बहाना । दुनिया को बता देंगे की राज्यपाल की छोड़ो हमें तो PM भी कुछ नहीं करने दे रहा है । पार्टी फण्ड में एक ढेलानहीं है लेकिन बंदा विज्ञापन पर विज्ञापन ढेले जा रहा है पैसे भी नहीं है क्या कर रहे है समझ में ही नहीं आ रहा है लेकिन एक बात जरुर है अभी आप लोग देख ही रहे होंगे की आम का सीजन जा रहा है और जब आम का सीजन जाता है तो आम नखरे दिखता है अरे भाई आई मीन महँगा हो जाता है और फिर लोग जबान से उसे उतार देते है आम का सीजन जा रहा है और आम आदमी का सीजन भी जा रहा है बेचारे दिल्ली वाले सोचा था वाई फाई फ़ोकट में मिलेगा,बिजली फ़ोकट में मिलेगी,पानी के पैसे नहीं देने पड़ेगें हा सही है लेकिन पैट्रोल के पैसे दूसरी जगह से डेढ़ गुना ज्यादा देने पड़ेगें ये नहीं सोचा था भाई दिल्ली में सस्ती बिजली , पानी , वाई फाई के लिए थोड़े पासे देने पड़ेंगे और थोड़े पैसों के लिए कम पर जाना पड़ेगा कम पर जाने के लिए साधन चाहिए , गाड़ी चाहिए , साधन , गाड़ी पैट्रोल से चलेंगे और वो आम आदमी महँगा को महँगा मिलेगा । महँगा मिलेगा तो  बचत करोगे , बचत कैसे होगी जब तुम काम पर कम जाओगे और काम पर काम जाओगे तो मालिक तुम्हारा जीजा साला बहनोई या बाप नहीं है लात मारके बाहर कर देगा । तब काम नहीं होगा पैसे नहीं होंगे तो फोकट में हर चीज चाहिए । फ़ोकट में मिलेंगे नहीं तो हम क्या देंगे धरना , और दुनिया को बतायेगें की PM हमें काम नहीं करने दे रहा है । मै कुछ कहता की तभी हमारे GM साहब की आवाज आई हिसाब बन गया  हो तो अकाउंट का मिलानकर लो । बस गधे जुट गए काश हमारे कार्यालय में भी कोई आम आदमी होता । हाय रे किस्मत वो शुभ दिन कब आयेगा कब हमारे कार्यालय में वो आम आदमी अवतार लेगा ।

Saturday, 18 July 2015

मरा घोडा और अलविदा की वो नमाज

सब से पहले सभी भाइयों  को ईद की बधाई । कल अलविदा की नमाज थी, और शहरे लखनऊ में अलविदा के लिए भारी भीड़, सभी चाहते थे की वो नमाज की पांत में मोलवी के सामने सबसे आगे खड़े हो कर नमाज पढ़े  करे । कल सारा दिन टीवी पर अलविदा की भीड़ ही दिख रही थी, शाम को हमारी जाने हयात आई मीन मेरी पत्नी और मै चाय पी रहे थे की अचानक कक्कू का फोन आ गया दुआ सलाम के बाद ढेर सारी बात हुई, फोन रखने के बाद मुझे अचानक हसीं आ गई, बस हमारी धर्म पत्नी को सवाल पुछने का मौका  मिल गया । हमने उन्हें टालने की कोशिश की, लेकिन जब वो नहीं मानी तो बताना पड़ा । हाँ तो किस्सा ये था की पांच साल पहले अलविदा की नमाज़ घोड़े के साथ हुई, वो ऐसा हुआ की रमजान की महीने में हमारे गाँव में दिल्ली से कुछ कमासुत पूत जुम्मन मिया  घर आये और वो दिल्ली की बाते डींगे हांकते हुए बताया करते की गोया दिल्ली से नहीं न्यू यार्क से आये है । जहाँ जुम्मन मिया बैठते वही महफ़िल जम जाती बातों की ,  बस बातें ही बातें, खाने को तो कुछ मिलता ही  नहीं था । लगे हाथ कक्कू को भी पता चला की दिल्ली की जामा  मस्जिद में नमाज पढ़ना बड़े सौभाग्य की बात है बस तय हो गया की इस बार अलविदा की नमाज जामा मस्जिद में ही  पढ़ी जाएगी और तैयार हो गई 8 -9 युवा नमाजियों की  सेना।  सभी जुम्मन मियां के यहाँ पहुंचे पता पुछने, वो  क्या है की कभी कोई दिल्ली तो क्या इलाहबाद भी नहीं  गया था । पहले तो हमारे जुमन मियां ने समझाने की कोशिश की लेकिन लोग तो खुटा गाड़ के ही बैठ गए, तभी  आपा  ने डांटा बताते क्यू नहीं , इन्हें भी तो पता चले की दुनिया में क्या हो रहा है । डर के मारे जुम्मन मिया ने पता बताया की स्टेशन से यहाँ उतरो, यहाँ बस पकड़ो, यहां पैदल चलो, यहाँ  घुमो, यहां मुङो वगेरा वगेरा । सभी भाइयो ने बाकायदा कागज - कलम से नक्शा भी बना लिया । घर पहुंचे, घर वालो को खुसखबरी सुनाई । बस हर तरफ बधाई शुरू, की फला  मिया, चचा का सपूत जामा मस्जिद में अलविदा की नमाज पढ़ेगा । कसम खा कर  कहता हूँ  की  ऐसा लगता था की जामा  मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ने जा रहे है ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में स्नातक का एड्मिसन हो गया है और अब वही पढाई होगी । मेरी दादी भी बहुत खुश थी की गांव  का नाम हो रहा है और साथ ही अब अपने  खेत में कुछ दिन कक्कू की बकरिया नहीं आएगी । खेत में बोई हुई ककड़ी और खीरा भी बचेगा, वो क्या है की कक्कू की वजह से खेत से कभी भी हमारे घर ये सब नहीं आ पाता  था कक्कू ही खा पी कर साफ किये रहते थे खेत में बतिया लगी नहीं की कक्कू ने सफाया किया नहीं,पाचन क्रिया दुरुस्त रहे इसके लिए वो हमेशा एक पुड़िया में काला नमक हमेशा अपनी जेब में लिए रहते थे । हाँ तो भाई वो शुभ  दिन आ गया कक्कू, फेकूं , ऑफिश,रजा , सौकत , मुनकू , अच्छे , जमील सब तैयार । गाव वालो ने गाजे बाजे के साथ सभी को बिदा  किया । जब सब भाई प्रतापगढ़ स्टेशन पर पहुंचे तो याद आया की यार रिजर्वेशन  तो किसी का है ही नहीं । लो गई भैस  पानी में । इन आठो में सौकत पांचवा पास था । बाकि सात उसे ऐसे देख रहे थे जैसे वो अन्धो में काना राजा है । अब सौकत की डिग्री की बात थी डिग्री मतलब पांचवीं पास की मार्कशीट,  समझती नहीं हो । मैंने धर्म पत्नी  के पूछे प्रश्न का जवाब दिया । अब टोकना मत । हाँ तो भैया पहुंचे एक साहब के पास, साहब मतलब पता नहीं लेकिन सफ़ेद कपड़ो में टोपी लगाये गेट पर खड़ा था । साहब भी शरीफ इन्शान थे तुरंत बोले अमे गाड़ी आ रही है टिकट लो और जनरल में घुसो । टिकट लेने की जिम्मेदारी दी गयी मुनकू को।  मुनाकू वो पक्का पंसारी, दीमाक लगाया की पिछली बार जब अंतु जा रहा था तो कितनी भीड़ थी, और भीड़ में किसी ने टिकट पूछा तक नहीं और वो स्टेशन के पीछे वाली टूटी दिवार से निकल लिया था, सो उसने टिकट लिए कुल जमा 7 । अपना नहीं बनवाया टिकट सोचा फालतू में कौन  पैसे बर्बाद करे वो तो फिर से टूटी दिवार से निकल लेगा । अच्छा लो तो ट्रैन आ गई नाम था काशी विश्वनाथ । खचा खच भरी , लगता था की जैसे सब जामा मस्जिद ही जा रहे है । तीन एक डब्बे में चढ़े, चार दूसरे में  बस मुनकू चढ़े, रसोई यान में  । कक्कू, फेकूं , ऑफिश को किसी तरह शौचालय में जगह मिली । रजा , सौकत ,अच्छे , जमील पायदान के पास।  लेकिन अपना मुनकू आराम से कद्दू के बोर पर बैठा था वो क्या है की उसे पता नहीं था की रसोई यान में भी शीटें  होती है । ट्रैन अपनी पूरी रफ़्तार से भाग रही है।  तभी समोसा बेचने वाले एक कर्मचारी की नजर मुनकू पर पड़ी । उसने दबोचा क्यू बे चोरी कर रहा है अयं तभी सोचु रोज अंडे और आलू कैसे कम हो रहे है आज पकड़ में आया है तेरी टाँगे टुटेगीं तो समझ आएगा । मुनकू की तो नानी ही मर गई ये तो वही मिसाल हुई की चले तो थे हरी  भजन को ओटन लगे कपास । खैर  मुनकू मियां की पेशी रसोई यान के मैनेजर के सामने हुई । मैनेजर बड़ा कड़क, तुरंत हुकुम जारी मुर्गा बनाओ साले को । तभी संयोग से किसी बावर्ची ने पीछे से आवाज लगाई , मुर्गा आ गया हो तो काट कर ले आओ ये सुनना  था की मुनकू  को चक्कर आने लगा । बेचारा मुनकू बड़े हाथ पैर जोड़े, दुहाई दी लेकिन मैनेजर टस  से मस नहीं हुआ आखिर मुर्गा बनना पड़ा, वो उस समय को कोस रहा था जब वो इस खाली डब्बे में चढ़ा । कास अच्छे की बात मान ली होती तो ये दिन तो नहीं देखना होता । हर आने जाने वाला कर्मचारी  उस की पीठ पर हाथ गरम कर के जाता । आखिर कर एक बुजुर्ग कर्मचारी को उस पर दया आ गई और उसने इस मुर्गे को मतलब मुनकू को इंशान  बनाया । उस दिन मुनकू को मास्टरजी की बात याद आ गई की मुनकू पढ़ लो वरना सब तुम्हे गधा ही समझेगें । वक्त ने मुनकू को इस चलती ट्रैन में ही गधा , मुर्गा और इंसान के बीच का फर्क बता दिया था । इधर कक्कू, फेकूं , ऑफिश शौचालय  में बंद पड़े है कोई चिल्ला रहा है , दरवाजा पिट रहा है गरिया रहा है अबे साले  निकल वरना मेरी चड्ढी में ही निकल जाएगी । लेकिन तीनो ने दरवाजा नहीं खोला । इस लिए नहीं, की एक बार बाहर आने के बाद दुबारा नहीं घुस पायेगे बल्कि इस लिए की अगर बाहर निकले तो तीनो की खूब पिटाई होगी । सो किसी तरह नाक बंद किये तीनो शौचालय  में ही बंद पड़े रहे । दूसरे डब्बे में पायदान के पास पड़े  रजा , सौकत ,अच्छे , जमील लातो  के निचे दबे हुए कराह रहे थे।  ये कम था  की एक बेगम साहिबा गम लेकर आ गयी । उल्टियाँ हो रही थी, क्या करे किसी की समझ में नहीं आ रहा था । बेचारे कक्कू सोच रहे थे की एक बार जामा  मस्जिद में नमाज़ पढ़ आये  उसके बाद दुबारा कभी ऐसी हिमाकत नहीं करेंगे अपनी कुएं  वाली मजार ही भली वही मक्का वही गाजा । खैर लात- घुसे, शौचालय की बदबू सूघते, मुर्गा-मुर्गी बनते सभी नमाजी नई  दिल्ली सेंट्रल स्टेशन पर पहुंचे । बाहर निकल कर सभी ने चैन की साँस  ली, लेकिन अभी मुसीबत ख़तम  कहाँ  हुई थी । मुनकू मिया टूटी दिवार ढूढ़  रहे थे निकलने के लिए, मुनकू को इस बात का संतोष था की भले ही मुर्गा बनना पड़ा लेकिन टिकट के पैसे तो बचा ही लिए ।  लेकिन ये क्या यहां तो कोई टूटी दिवार ही नहीं है निकले कहाँ से । तभी जमील ने आवाज लगाई की अरे मुनकुआ अबे खड़े ही रहोगे चलो । मुनकू ऊपर वाले का नाम लेकर साथ हो लिए और तक़रीबन तक़रीबन बहार आ ही गए थे की पीछे धीरे धीरे चल रहे रजा को टीटी  ने रोक  लिया और टिकट के लिए पूछा अब सबकी टिकट क्यू की मुनकू के ही पास थी इस लिए सब को लौटना  पड़ा । मुनकू को तो मनो काटे पर खून नहीं का हाल  हो गया । लगभग रजा को गरियाते हुए वो भी लौटा । मुनकू ने कापते हुए हाथो से 7 टिकट टीटी के  हवाले किये टीटी ने चेक किये अरे ये तो  7  ही है आठवां  कहाँ है अब सब सब मुनकू को देख रहे थे और बेचारा मुनकू आगे  होने वाले हस्ल को याद करके कांप  रहा था ।  टीटी ने घुड़की दी नहीं की मुनकू ने बकना शुरू कर दिया । बाकि बचे 7 अपना सर पकड़ कर बैठ गए । टीटी  सभी को जीआरपी  के हवाले  कर आगे बढ़ा । जीआरपी  का सिपाही  सभी को थाने  ले आया । थानेदार मुछुन्दर, उसकी मुछे  ही देख कर आठो  की हालत पतली हो  गई , मुनकू दौड़ा थानेदार के चरणो में गिर पड़ा ऐसे लगा जैसे साला अपने जीजा से मिल रहा हो । थानेदार पूछो सिपाही नाल  क्या किया इन सब ने, सिपाही बोला टिकट ना  है कहानी सुनाये है नई नई । क्यू बे कहानी  आवे  है थानेदार ने अर्दब में लिया । कक्कू ने हिलते हुए कहानी दोहराई । थानेदार बोला लो भैया  गमन का ममला होए , बैठे बैठे भ्रष्टाचार अयं , बोल बे । क्या कलयुग आ गया है जनता खुद भ्रष्ट  है और नेता से हिसाब लेवे है । बस  पुरे थाने में हा हा ही ही गूंज उठा मनो हास्य कवि सम्मेलन चल रहा हो । खामोश थानेदार चिल्लाया बंद करो सालो को । बड़े हाथ पैर जोड़े पर थानेदार तो थानेदार है बिना कुछ लिए छोड़ेगा थोड़े ।   जीआरपी के थाने  में रात  भर सभी मुनकू को लानत भेजते  रहे। बेचारा मुनकू  टिकट ही तो नहीं लिया था लेकिन अब क्या हो सकता था।  मुनकू को मास्टर जी की बात याद आ रही थी पढ़ ले नालायक वरना एक दिन थाने के चक्कर  लगाने पड़ेगें, लो लग गई । अगले दिन अलविदा की नमाज थी। सुबह हुई  थानेदार आया , सिपाही लपका ले दे कर मामला निपटाओ वरना गए और नमाज भी गई ।  सब ने फिर मुनकू की तरफ देखा बेचारा मुनकू टिकट के पैसे निकल कर थानेदार के पैरो में गिर पड़ा , बड़ी मिन्नत की , आखिर थानेदार पिघला, सिपाही को इसरा किया सिपाही ने  तेज डाटा और थाने  से बाहर निकाला । मुनकू गरियाया की साले  ने 250 रुपये जो टिकट से बचाये थे वो भी गए साले  दिल्ली वाले बड़े भिखारी होते है । खैर मुसीबत खत्म होने के बाद अचानक रजा को याद आया की जामा मस्जिद का  पता वो तो कागज में लिखा था और कागज तो कक्कू के पास है। कक्कू  ने खोजा, लेकिन वो कागज नहीं मिला पता नहीं कहाँ गिर पड़ा । लो फिर  गई भैस पानी में लगता है  कभी पानी से बाहर  आएगी ही नहीं  । तभी फेंकू बोला अरे कहे घबरा रहे हो आज अलविदा है सब वही जा रहे होंगे  हम भी पीछे पीछे हो लेंगे ।  सब को आईडिया पसंद आया। फेंकू ने खुदा का मन ही मन शुक्रिया किया क्यू की पहली बार ऐसा हुआ है, आज उसकी जिंदगी का बहुत बड़ा दिन था । पता नहीं किस किस के पीछे चले । चलते ही जा रहे है सड़क है की ख़तम  ही नहीं हो रही है अफ़िश सोच रहा था की अगर इतनी मेनहत उसने खेत में की होती तो इस बार खूब गेहूं पैदा होता । लेकिन अब क्या हो सकता है अब तो सड़क की लम्बाई ही नापनी पड़ेगी इन नालायको के साथ । चलते चलते वो जामा  मस्जिद तो नहीं लेकिन एक गली में जरूर पहुंच गए । अब ये संजोग कहे या कुछ और की अच्छे ने एक आदमी से जामा मस्जिद का पता पूछ लिया, जो अपने घर के सामने परेशान सा खड़ा था । उसने उन आठो  को बड़े गौर से देखा, मुस्कुराया और बोला ,लगता है आप लोग तो बड़ी दूर से आये  है जरा बैठिये आराम कीजिये वैसे भी 3 बजने वाले है अँधा क्या मांगे दो आँखे । बस  फिर क्या सब बैठ गए । मुह हाथ धोया , रोजा थे इस लिए कुछ खाया  नहीं, कुछ आराम करने  के बाद उस आदमी ने बताया की वह भी जामा  मस्जिद जायेगा नमाज के लिए लेकिन उसका घोडा मर गया है और मुंसिपल्टी  के आदमी नहीं आये अभी तक।  अगर आप लोग कुछ मदद कर सके तो बड़ी मेहरबानी होगी । सभी ने उसे बताया की मरे हुए घोड़े के चारो  पैर बांध देने चाहिए फिर बीच में एक लाठी  उसके पैरो में फसा कर टाँग  लो और  बाहर हर दो । वो आदमी तेजी से उठा और सब सामान लाया ।  अब आप तो जानते ही है की गांव  वाले मदद  करने के लिए हमेशा तैयार रहते है  । सभी जुट गये बांध डाला, लाठी फसाई, कंधे पर उठाया , और लेकर आ गए बहार।  घोड़े का मालिक बोला आप लोग यही खड़े रहिये मै ताला लगा लू बस।  भैया ताला  लगाने गए और लौट के वापस ही नहीं आये।  घर के बाहर कंधे पर मरा हुआ घोडा लटकाये खड़े इन लोगो को पुलिस वाले भाई ने लताड़ लगाई।  अब मरता क्या न करता कितना समझाया की ये उस आदमी का है जो अंदर ताला लगाने गया है। लेकिन वो नहीं माना । सिपाही ने पूछा किस आदमी का, नाम तो किसी ने उसका पूछा नहीं था क्या बताये किस आदमी का । जमील ने लड़खड़ाती जबान से बताया की सामने वाले घर में है वो आदमी । सिपाही ने सामने वाला घर खटखटाया अंदर से जानना बुर्के में बाहर निकली, सिपाही ने उससे पूछा ये मरा घोडा तुम्हारा है । जनाना ने पूछा कौन सा घोडा साहब, सिपाही चिल्लाया  अरे ये तुम्हारे सामने जो आठ गधे मरे हुए घोड़े को लटकाये खड़े है, दिखता नहीं क्या। अरे क्या बोल रहे हो साहब हम गरीब बकरी तो पाल नहीं सकते घोडा क्या खाक पालेंगे।  हमारा नहीं ये।  क्यू बे झूठ बोलता है ले चालू थाने सिपाही ने अर्दब दिया।  थाने  का नाम सुनते ही सभी को चक्कर  आने लगा।  कक्कू चिल्लाये अरे नहीं साहब गलती हो गई अरे खड़े क्या हो नालायको आगे बढ़ो , कक्कू ने हांक लगाई।  अब जहा जाते हँसी की आवाज आती।  सारा दिन मरे हुए घोड़े को कंधे पर लिए भूखे प्यासे घूमते रहे। जहा जाते जिस चौराहे  पर जाते आवाज आती आगे  बढ़ो जल्दी।   सबको जल्दी है।  रोजा  खोलने का वक्त हो गया है  नमाज तो पढ न पाये। काम से काम रोज तो खोल ले समय पर।  शाम के सात बजने वाले है वो आठो  नमाजी मरे हुए घोड़े को कंधे पर उठाये इधर से लेकर उधर, और इस चौराहे से लेकर उस चौराहे  तक घूम रहे है तभी रजा चिल्लाया वो देखो स्टेशन , गाड़ी की आवाज आ रही थी शायद अपने ही गाव की रेल हो।  इतना ही सुनना  था की सभी ने घोड़े को सड़क किनारे फेका और तेजी से स्टेशन की तरफ लपके।  अब कोई इस रेल को नहीं छोडना  चाहता  था।   अब उन्हें अलविदा की नमाज नहीं चाहिए उन्हें रेल  चाहिए , जो बस उनके गांव जा रही हो।  सब दौड़े ट्रैन में चढ़े बिना ये जाने  की कौन सी ट्रैन है और ना हीं टिकट लिया।  वो  थके हुए  थे हारे हुए थे। अब ये संजोग है की वो विकलांग  डिब्बे में थे।  ये डिब्बा सही था उनके लिए,  क्यू की  उनकी हालत विकलांगो से भी ज्यादा ख़राब थी।  शायद ऊपर वाले को उन पर दया आ गयी। सुबह तब आँख  जब कुली ने जगाया अरे भैया उठो  ई  प्रतापगढ़  आ गवा है और अब गाड़ी आगे  ना  जावेगी . क्या प्रतापगढ़ आ  गया।  हमार  घर आ  गवा।  सब चिल्लाये और घर की तरफ दौड़े।  सब खुस थे  क्यू की आज  ईद है और ईद तो घर पर ही होनी चाहिए।  मेरा इतना कहना था की मेरी पत्नी  जोर से खिलखिला कर हँस  पड़ी , और सच बताऊ उसकी हंसी से बढ़ कर मेरे लिए कोई  ईदी नहीं हो सकती। 

तो ईद मुबारक।


Friday, 17 July 2015

मेरा अद्द्भुत भारत

मेरा अद्द्भुत भारत जिसकी पहचान अब बदल रही है लेकिन फिर भी पुरानी लंगड़ी नहीं बदल रही है जैसे की 
भारत के बारे में 15 ऐसे तथ्य जो मजाकिया होने के साथ सच भी है।

1. भारत एक ऐसा देश है जो कई स्थानीय भाषाओ द्वारा विभाजित है और एक विदेशी भाषा द्वारा एकजुट।

2. भारत मे लोग ट्रैफिक सिग्नल की रेड लाइट पर भले ही ना रुके लेकिन अगर एक काली बिल्ली रास्ता काट जाए हो हज़ारो लोग लाइन में खड़े हो जाते है। अब तो लगता है ट्रैफिक पुलिस में भी काली बिल्लियों की भर्ती करनी पड़ेगी।

3. चीन अपनी सरकार की वजह से तरक्की कर रहा है और भारत में तरक्की ना होने का सबसे बड़ा कारण उसकी अपनी सरकारें ही रही हैं।

4. भारत का मतदाता वोट देने से पहले उम्मीदवार की जात देखता है ना की उसकी योग्यता। अब इन लोगों को कौन समझाये की भाई तुम देश के लिए नेता ढूंढ रहे हो ना की अपने लिए जीजा।

5. भारत एक ऐसा देश है जहाँ एक्टर्स क्रिकेट खेल रहे है, क्रिकेटर्स राजनीति खेल रहे है, राजनेता पोर्न देख रहे है और पोर्न स्टार्स एक्टर बन रहे है।

6. भारत में आप 'जुगाड़' से करीब-करीब सब कुछ पा सकते है।

7. हम एक ऐसे देश में रहते है जहाँ नोबेल शांति पुरस्कार मिलने से पहले लगभग कोई भारतीय नहीं जानता था की कैलाश सत्यार्थी कौन है। लेकिन अगर एक रशियन टेनिस खिलाडी हमारे देश के एक क्रिकेटर को नही जानती तो ये हमारे लिए अपमान की बात है।

8. 'भारत चौदह करोड़ मुस्लिमो का घर, और कोई अलक़ायदा नहीं'।- जॉर्ज बुश

9. भारत में किसी अनजान से बात करना खतरनाक है, लेकिन किसी अनजान से शादी करना बिलकुल ठीक।

10. हम भारतीय अपनी बेटी की पढ़ाई से ज्यादा खर्च बेटी की शादी पे कर देते है।

11. हम एक ऐसे देश में रहते है जहाँ एक पुलिसवाले को देखकर लोग सुरक्षित महसूस करने की वजाए घबरा जाते है।

12. हम भारतीय बहुत शर्मीले है फिर भी 125 करोड़ है।

13. हम भारतीय हेलमेट सुरक्षा के लिहाज़ से कम, चालान के डर से ज्यादा पहनते है।

14. भारत गरीब लोगो का एक अमीर देश है।

15. भारतीय समाज सिखाता है की 'बलात्कार से कैसे बचें' नाकि ये की 'बलात्कार ना करें'।


तो अभी सोचो साथ क्या जायेगा ।

Monday, 13 July 2015

निंदक नियरे राखिए और मजे लीजिये


निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय।
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।।
कबीर दास जी कहते हैं कि व्यक्ति को सदा चापलूसों से दूरी और अपनी निंदा करने वालों को अपने पास ही रखना चाहिए, क्यूंकि निंदा सुन कर ही हमारे अन्दर स्वयं को निर्मल करने का विचार आ सकता है और यह निर्मलता पाने के लिए साबुन और पानी कि कोई आवश्यकता नहीं होती है ।

लेकिन मैं   मानता भाई मेरा मानना है की पीठ पीछे दुसरो का चरित्र हनन करना, बुराई करना , इधर की उधर लगाना बड़ा ही रोचक एवं रस से भरा हुआ कार्य है इस में इतना रस है की जितना तो अनुष्का शर्मा के ओठो में भी नहीं होगा, बस  पीते  जाओ, पीते जाओ। न मन भरता है और न  मन मानता है । अगर इस कार्य को आप करने लगे तो  मोहल्ले  में आपकी धाक जाम जाएगी । तांक झांक करने वालो का विशेष स्वागत किया जाता है । यकींन  नहीं तो अपने ऑफिस में देख लो, काम करने वाला या वाली गधे की तरह काम कर रहा है और तांक झांक  करने वाला या वाली आराम से बॉस के कमरे में बैठ कर AC का आन्नद लेते रहते है, चाय का दौर चलाते  है साथ में समोसे भी होते है और कही आपके ऑफिस के बगल  लल्न के दुकान के हो तो मजा आ जाता है लेकिन अगर तांक झांक करने का गुण आप मे नहीं है या आप इधर की उधर नहीं करते और आपका इस सिद्धांत में अटल विश्वाश है की काम और मेनहत  करने से आदमी कामयाब होता है तो जरा अपने मोहल्ले के धोबी के गधे को ही देख लीजियेगा सारी  गलत फैमी दूर हो जाएगी, और मैं लिख कर दे सकता हूँ की आपको मजे कभी नहीं मिलेगें । आप कभी लोक प्रिय नहीं हो सकते, आपका कभी मान नहीं होगा क्यू की आप सिर्फ अपने काम से काम रखते है  आपके ऑफिस में काम करने वाली सुकोमल  कन्या कभी आप से लिफ्ट  नहीं मांगेंगी और आप हमेशा उसके भैया ही बने रहोगे । अरे निंदा करना कोई मजाक का काम नहीं है इसमें तो  स्मार्टनेस होनी चाहिए । मोहल्ले की किसी लड़की को लड़के के साथ देखिये और और लपलपाती जीभ, फूलता पेट और सामान्य सी बात को तील से ताड, नहीं माफ़ कीजिये पहाड़ बनाने की क्षमता रखना मामूली बात नहीं है । ऑफिस में किस का किस के साथ चककर  चल रहा है किस ने कहाँ जाने का प्लान बनाया है, कौन आपकी नज़र में काम कर रहा है और कौन नहीं, इस का साबुत तो स्मार्ट कर्मचारी ही दे सकता है जैसे ही वो समार्ट आदमी दरवाजा खोलता है समझो बॉस की तो घंटी ही बज जाती है और अगर बॉस महिला हो तो और मजेदार हो जाता है । बस  नैतिकता की सीता, और आयातित जीवन मूल्यों के दुष्प्रभाव से रसातल में जा चुकी निंदा का मजा लीजिये । दोनों ही खुश होते  है एक अपनी कलाकारी से,  तो दूसरा किसी की नाक कटाई से । खुद गटर में रह कर दुसरो पर गन्दगी उछालने  का आनंद आज के समाज की  बड़ी उपलब्धि है और ये उपलब्धि आप मे नहीं है तो आप जिन्दा क्यू है ।हर ऑफिस में तथाकथित सच्चाई  को समर्पित 2 -4  स्मार्ट कर्मचारी होते है । क्यूकी असत्य का अधिनायक जानता है की झूठ के सुपरसोनिक जेट प्लेन में  अत्याधुनिक इंजन लगे होते है । मेरे प्यारे काम करने वालो, ये जान लो की वाक - शक्ति से चलने वाला जहाज जो कीर्तिमान बना सकता है वो तुम्हारी दिन रात की मेनहत भी नहीं बना सकती है।  एक बात जान लो अगर सुबह जल्दी उठने  से आदमी अमीर  हो जाता तो तुम्हारा अख़बार वाला आज अरबपति होता और मेनहत करने से कोई राजा हो जाता तो गधा जंगल का राजा होता । बड़ा बनना है तो काम कम करो  स्मार्ट ज्यादा बनो । 

Wednesday, 8 July 2015

दुष्यंत कुमार जी की नजर से तो देखो जरा असमान अभी भी काले है

 इस बारिश के मौसम में महा कवि दुष्यंत कुमार जी की एक कविता प्रस्तुत है

बाढ़ की संभावनाएँ सामने हैं,
और नदियों के किनारे घर बने हैं ।

चीड़-वन में आँधियों की बात मत कर,
इन दरख्तों के बहुत नाजुक तने हैं ।

इस तरह टूटे हुए चेहरे नहीं हैं,
जिस तरह टूटे हुए ये आइने हैं ।

आपके कालीन देखेंगे किसी दिन,
इस समय तो पाँव कीचड़ में सने हैं ।

जिस तरह चाहो बजाओ इस सभा में,
हम नहीं हैं आदमी, हम झुनझुने हैं ।

अब तड़पती-सी गजल कोई सुनाए,
हमसफर ऊँघे हुए हैं, अनमने हैं ।

 इस कविता की खास बात ये है की इस कविता में कवि ने बारिश में होने वाले प्रेम अनुराग का चित्रण करने की बजाय बारिश में होने वाली त्रासदी को दर्शाया है ये त्रासदी बिहार की  है , उत्तरप्रदेश की है उत्तराखंड की है और ना जाने कितने प्रदेशो की है जो आजादी के 65 सालो के बाद भी नहीं सुधरी । समस्या ये नहीं की बारिश ज्यादा हो रही है या कम  हो रहगी है समस्या ये है की इतने दिनों बाद भी कोई इस में सुधर नहीं चाहता सरकार तो वैसे भी नालायक होती है उसे तो तब ही याद आती है जब पानी सर के ऊपर हो जाता है लेकिन आम आदमी तो इस में सुधर, बचाव की गुंजाइस कर सकता है । पेड़ लगा सकता है, बाढ में बचने की तैयारी  कर सकता है । खुद एवं दुसरो को बचने के उपाय कर सकता है । सिर्फ सरकार एवं अफसर के भरोसे रहेंगे तो आपके हाथो से सिर्फ जान जाएगी । बारिश आ रही है, आ  चुकी है हो सकता है की ये बारिश खेतो के लिए कम  हो लेकिन बाढ़ के लिए बहुत ज्यादा है खुद सुरक्षित रहिये एवं दुसरो को भी सुरक्षित कीजिये ।

Tuesday, 7 July 2015

समरथ को नहीं दोष गुसाई

अभी कुछ दिनों पहले अख़बार में पढ़ा की मुंबई में एक महिला वकील ने शराब पी  कर फुटपाथ पर  सो रहे लोगो पर अपनी कार  चढ़ा दी । उसके पहले भी एक खूबसूरत मानवीय गुणों से भरपूर  उच्चपद असिन एक सुकुमारी ने फुटपाथ पर सो रहे लोगो पर मेहरबानी कर दी । जब से भाईजान के एक चापलूस ने ये कह दिया की फुटपाथ तो कुत्तो के लिए होता है । तब से हर सामर्थवान कुत्तो से फुटपाथ खाली करवाने में जुट  गया है अभी कुछ दिने पहले एक फिल्म देखि थी जॉली एल एल बी उस में एक वकील साहब को सुसु आती है तो सोचते है की यही फुटपाथ पर निपट लेते है, लेकिन ये क्या पीछे से आवाज आती है "साहब ये हमारे सोने की जगह है आप कही और निपट लीजिये " इस एक लाइन में सब कुछ है । आज भी सैकड़ो लोगो के पास छत नहीं है गर्मी में फुटपाथ , बारिश सर्दी में सड़क किनारे पड़ी कोई पाइप । इनका आधा जीवन इस सोच में काट जाता है की हम भी इन्शान  है और आधी इस सोच में की हम इंसान नहीं कुत्ते है । समस्या तो तब हो जाती है जब महिला इस तरह की हरकत करती है लोग उससे शराब पीने, पि कर गाड़ी चलाने, या स्वछँदता की आशा नहीं करते । ये ठीक वैसा ही है जैसे की रमजान में हर मुस्लिम से रोजे की कामना सामने वाला करता है । महिला हर हाल  में पुरुष को पीछे छोड़ना चाहती है लेकिन किस किस रास्तों  पर । हमारे कुछ महिला चापलूस जिन्हे मै शोहदा कहूँगा इस मामले को नारी शक्ति से जोड़ देते है की कई पुरुष कर रहे है तो कुछ महिलाये क्यू नहीं कर सकती । लेकिन मामला स्त्री पुरुष का नहीं है मामला है समर्थवान होने का । क्यू की समर्थवान की नजरो में ही फुटपाथ पर कुत्ते सोते है और आप तो जानते होगे की समरथ को नहीं दोष गुसाई ।

Monday, 6 July 2015

उपदेश कुशल बहुतेरे, जे आचरहिं ते नर न घनेरे

ओके चलो मै  आ गया ।  बहुत दिनों से इच्छा थी की मै  ब्लॉग लिखु,  सो व्हाट्स,  आई एम  हियर, शुरुवात करते है एक विचार से "पर उपदेश कुशल बहुतेरे, जे आचरहिं ते नर न घनेरे" 'इस का मतलब ये है की "औरों को नसीहत, खुद मियां फजीहत"  मध्य प्रदेश के व्यसायिक परीक्षा मंडल को संक्षिप्त में व्यापम कहते है अब ये  व्यापम है ना इस में बहुत सारे  राज है अरे बिपाशा वाले नहीं । राज का नाम सुनते ही लार टपकाने लगे । ये तो प्री  मेडिकल टेस्ट ,प्री  इंजीनियरिग टेस्ट और कई सरकारी परीक्षाये करवाता है सुना है,अब  सुना है तो सच ही होगा । व्यापम में फर्जी तरीके से शिक्षको , कॉन्टेबलो  फ़ूड इंस्पेक्टर,  नाप तौल विभाग  सभी में जुगाड़ से पक्की वाली नौकरी मिल जाती है बस थोड़ी सी मिठाई खिलानी पड़ती है अरे मिठाई भाई गुलाब जामुन बर्फी और क्या, वो भी साहब के बच्चो के लिए बस । हमारे साहब मिठाई थोड़े ही खाते है उंन्हे  तो शुगर है डायबिटीज़ है बीपी है पता नहीं लो है या हाई ।  लो ही होगी तभी तो लेते रहते है अख़बार में निकला है की तक़रीबन 1000 नौकरी और 500 मेडिकल सीटे  साहब के आशीर्वाद से प्राप्त हुई है वैसे शिव राज की ईमानदारी पर शक नहीं है लेकिन जब ईमानदारी ख़ामोशी  बन जाय तो उसमे बेईमानी की बदबू आने लगती है सरकार कहती है कुछ लोगो के बारे में,  जो लोग इस की छानबीन में  या जो इस में लिप्त थे मारे गए तक़रीबन 25, अख़बार कहता है नहीं भाई वो तो 50  थे लेकिन सब से अलग हमारे मध्य प्रदेश के मंत्री जी कहते है की मरने वाले उन से बड़े थे क्या, बड़े तो वो है । ये तब कहा  जब शिव के राज वहां मौजूद थे बेचारे चुप थे कुछ लोगो ने कहा की जब मंत्री जी ने ये बात कह कर ठहाका लगाया तो बेचारे शिव राज भी मुस्कुराये । अरे मुस्कुराने में क्यू कंजूसी हंसो  गाओ  । आम आदमी ही तो थे  मर गए साले । मरने के लिए ही पैदा हुये थे , अपनी मंजिल तक पहुंच गये,  ये तो हसने की बात है ख़ुशी मनाने  की बात है । हो सकता है मंत्री जी इस ख़ुशी में आज रात शैम्पेन  की बोतल खोले और कोई बलखाती हुई सुकुमारी कन्या "आओ राजा कुण्डी मत खड़काओ राजा सीधा अंदर आओ  राजा " मधुर आवाज में सुना  के दिल में चिंगारी भड़का दे । भाई जश्न होना चाहिए कीड़े मकोड़ो की जिंदगी जीने वाले लोग काम हो रहे है । जितने लोग मरेंगे उतने ही सवाल पूछने वालो की संख्या कम हो जायेगी । सरकार से कोई नहीं कहेगा नौकरी के लिए, राशन के लिए, सफाई के लिए ,  बिजली के लिए , पानी के लिए, सड़क के लिए, कोई नहीं पूछेगा । दो साल पहले व्यापम के बारे में सुना था वो भी डॉ  आनद राय के जरिये 7 जुलाई 2013  में इंदौर में पि एम टी की परीक्षा फर्जी तरीके से देते हुए फर्जी मतलब मुन्ना भाई नहीं देखी क्या । शिव राज की गलती ये है की उन्होंने कोई कार्यवाही तुरंत नहीं की अब गले में हड्डी हो गई है तो कहते है एस  टी ऍफ़ से जाँच करायेगे अभी क्यू तभी  क्यू नहीं। किस चीज का इन्तेजार कर रहे हो तुम लोगो के मरने का । वैसे भी अगर विकास की बात की जाये तो मध्य प्रदेश में विकाश हुआ है लेकिन विकाश के पीछे पिंकी की इज्जत भी लूटी गई । साहब लोगो ने खूब पिंकी को लूटा तिजोरी भरी बस 10 % विकास 90  % पिंकी का बलात्कार । छत्तीसगढ़ में भी यही है । आप अपने संशाधनों का पूरा इस्तेमाल नहीं कर सके, नियन्त्रण  नहीं कर सके औए इस लूट में जो जूठा मिल गया उसका विकास हो गया । व्यापम में शामिल छोटा बाबू  तो या तो सलाखों के पीछे है या मर गया बड़ा साहब का क्या वो नहीं पकड़ा जायेगा  अगर भरोसा  नहीं है तो कुंदन शाह निर्देशित, नशीरुद्दीन और रवि बासवानी अभिनीत फिल्म जाने भी दो यारो देख लीजिये । कुछ बताने को शेष नहीं रह जायेगा । अंत में इस व्यापम के चक्कर  में जो लोग नहीं रहे उनके लिए प्रार्थना एवं मंत्री जी के लिए शुभकामनाये
धन्यवाद