अभी कुछ दिनों पहले अख़बार में पढ़ा की मुंबई में एक महिला वकील ने शराब पी कर फुटपाथ पर सो रहे लोगो पर अपनी कार चढ़ा दी । उसके पहले भी एक खूबसूरत मानवीय गुणों से भरपूर उच्चपद असिन एक सुकुमारी ने फुटपाथ पर सो रहे लोगो पर मेहरबानी कर दी । जब से भाईजान के एक चापलूस ने ये कह दिया की फुटपाथ तो कुत्तो के लिए होता है । तब से हर सामर्थवान कुत्तो से फुटपाथ खाली करवाने में जुट गया है अभी कुछ दिने पहले एक फिल्म देखि थी जॉली एल एल बी उस में एक वकील साहब को सुसु आती है तो सोचते है की यही फुटपाथ पर निपट लेते है, लेकिन ये क्या पीछे से आवाज आती है "साहब ये हमारे सोने की जगह है आप कही और निपट लीजिये " इस एक लाइन में सब कुछ है । आज भी सैकड़ो लोगो के पास छत नहीं है गर्मी में फुटपाथ , बारिश सर्दी में सड़क किनारे पड़ी कोई पाइप । इनका आधा जीवन इस सोच में काट जाता है की हम भी इन्शान है और आधी इस सोच में की हम इंसान नहीं कुत्ते है । समस्या तो तब हो जाती है जब महिला इस तरह की हरकत करती है लोग उससे शराब पीने, पि कर गाड़ी चलाने, या स्वछँदता की आशा नहीं करते । ये ठीक वैसा ही है जैसे की रमजान में हर मुस्लिम से रोजे की कामना सामने वाला करता है । महिला हर हाल में पुरुष को पीछे छोड़ना चाहती है लेकिन किस किस रास्तों पर । हमारे कुछ महिला चापलूस जिन्हे मै शोहदा कहूँगा इस मामले को नारी शक्ति से जोड़ देते है की कई पुरुष कर रहे है तो कुछ महिलाये क्यू नहीं कर सकती । लेकिन मामला स्त्री पुरुष का नहीं है मामला है समर्थवान होने का । क्यू की समर्थवान की नजरो में ही फुटपाथ पर कुत्ते सोते है और आप तो जानते होगे की समरथ को नहीं दोष गुसाई ।
No comments:
Post a Comment